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Dairy News: डेयरी में खाद वैल्यू चेन से बढ़ती से किसानों की इनकम, मीथेन उत्सर्जन में भी आती है कमी

बैठक के दौरान एनडीडीबी के चेयरमैन और तमाम देशों के प्रतिनिधि.

नई दिल्ली. राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड NDDB के चेयरमैन डॉ. मीनेश शाह ने “वर्ल्ड मार्केट के लिए कोऑपरेटिव बिजनेस मॉडल का इस्तेमाल” विषय पर छह दिन के इंटरनेशनल ट्रेनिंग प्रोग्राम में हिस्सा लेने वाले डेलीगेट्स से बातचीत की. ये प्रोग्राम एनडीडीबी ने भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के इंडियन टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन (ITEC) प्रोग्राम के साथ मिलकर आयोजित किया था. जानकारी साझा करने और टेक्निकल सहयोग के जरिए विकासशील देशों की मदद करने के एनडीडीबी के संकल्प को दोहराते हुए, उन्होंने कोऑपरेटिव मॉडल के ज़रिए दूध की कमी से आत्मनिर्भरता तक भारत के सफ़र पर रोशनी डाली.

उन्होंने डेलीगेट्स को एनडीडीबी की खाद वैल्यू चेन के बारे में भी बताया, जो किसानों को अतिरिक्त आय देती है और साथ ही मीथेन उत्सर्जन को कम करती है. इसके अलावा, उन्होंने राशन बैलेंसिंग प्रोग्राम के बारे में भी जानकारी दी, जो दूध के उत्पादन और चारे की क्षमता को बेहतर बनाने में मदद करता है.

कई देश के प्रतिनिधि हुए शामिल
डॉ. शाह ने सहयोग करने के लिए NDDB की तत्परता का भरोसा दिलाया और डेलीगेट्स से अलग-अलग बातचीत की. जिसमें समावेशी और टिकाऊ डेयरी विकास पर जोर दिया गया.

इस प्रोग्राम में बांग्लादेश, भूटान, फिजी, गैबॉन, घाना, मॉरिशस और श्रीलंका के 10 डेलीगेट्स शामिल हुए.

यह प्रोग्राम क्लासरूम सेशन, फील्ड विज़िट और सांस्कृतिक अनुभवों के ज़रिए डेयरी विकास और कोऑपरेटिव बिजनेस मॉडल पर जानकारी के आदान-प्रदान का एक मंच प्रदान करता है.

दूसरी ओर छत्तीसगढ़ सरकार के कृषि उत्पादन आयुक्त (APC) और पशुधन विकास विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने एनडीडीबी आनंद का दौरा किया.

उन्होंने राज्य में सहकारी डेयरी विकास को मज़बूत करने पर चर्चा करने के लिए NDDB के चेयरमैन डॉ. मीनेश शाह से मुलाकात की.

चर्चा मुख्य रूप से जीनोमिक चिप्स, एम्ब्रियो ट्रांसफर-IVF आदि के ज़रिए राज्य में पशुओं की नस्ल सुधारने और डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे अत्याधुनिक रिसर्च लैब और बछिया पालन केंद्र) के विकास पर केंद्रित रही.

बैठक में छत्तीसगढ़ डेयरी फेडरेशन (देवभोग मिल्क) के अधिकारियों की ट्रेनिंग और क्षमता निर्माण, तथा दुर्ग (अंजोरा) स्थित दाऊ वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए एक्सपोज़र विज़िट पर भी बात हुई.

इसके अलावा, सहकारी डेयरी मॉडल के ज़रिए आदिवासी किसानों की आजीविका बेहतर बनाने के लिए बस्तर क्षेत्र में डेयरी विकास पर भी चर्चा की गई.

डॉ. शाह ने NDDB की खाद प्रबंधन और बायोगैस पहलों के बारे में भी बताया, जिसमें देश भर में टिकाऊ डेयरी को बढ़ावा देने के लिए सस्टेन प्लस एनर्जी फ़ाउंडेशन और JICA (जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी) के साथ सहयोग शामिल है.

NDDB के दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने जीनोमिक्स और OPU-IVF लैब, चारा और बायोगैस डेमोंस्ट्रेशन यूनिट्स, तथा मुजकुवा गाँव, अमूल डेयरी और त्रिभुवनदास फ़ूड कॉम्प्लेक्स में NDDB की पहलों को देखा.

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