Home पशुपालन (Camel) ऊंट: जानें इस साल क्यों मनाया जा रहा है इंटरनेशनल कैमलिड्स वर्ष, क्यों पड़ी इसकी जरूरत
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(Camel) ऊंट: जानें इस साल क्यों मनाया जा रहा है इंटरनेशनल कैमलिड्स वर्ष, क्यों पड़ी इसकी जरूरत

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प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. लोगों में ऊंट, के प्रति जागरुकता पैदा करने के लिए कि ये हमारी जिंदगी में कितने अहम हैं, संयुक्त राष्ट्र ने साल 2024 को अंतर्राष्ट्रीय कैमलिड्स वर्ष यानी अंतर्राष्ट्रीय ऊंट वर्ष (IYC 2024) घोषित किया हुआ है. दरअसल, ऊंट अब भी लाखों परिवारों के लिए आजीविका का सोर्स है. खासकर उन जगहों पर जहां सूखे जैसी स्थिति होती है. मसलन शुष्क भूमि और पहाड़ी क्षेत्रों में ऊंट को पाले जाने का कल्चर है. हालांकि दिन ब दिन इनकी संख्या में कमी देखी जा रही है. भारत में खासकर राजस्थान और लद्दाख जेसे इलाकों में ऊंट को पाला जाता है.

अंतर्राष्ट्रीय ऊंट वर्ष के लिए बोलीविया सरकार द्वारा प्रस्तावित और इक्वाडोर द्वारा समूह के कंट्री चेयर के रूप में प्रस्तुत किया गया था. जिसे संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अनुमोदित किया था. जिसके बाद अंतर्राष्ट्रीय कैमेलिड्स वर्ष आधिकारिक तौर पर 4 दिसंबर 2023 को शुरू किया गया था. फिर साल 2024 में ऊंट के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिए दुनियाभर में कार्यक्रम हुए. लोगों को बताया गया कि ऊंट का खाद्य और पोषण सुरक्षा, आर्थिक विकास के साथ-साथ सामाजिक-सांस्कृतिक में महत्व है. ये 90 से अधिक देशों में विरासत है.

ऊंट की क्षमता को नहीं पहचानते हैं लोग
गौरतलब है कि अफ्रीका के शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में समुदायों की आजीविका में ऊंट महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. ये जानवर खानाबदोशों के लिए आशा की किरण प्रदान करते हैं. जबकि चरम जलवायु परिस्थितियों में पौष्टिक भोजन का उत्पादन जारी रखते हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि ऊंटों का जितना योगदान और क्षमता है देखा जाए तो उसे कम पहचाना जाता है. अंतर्राष्ट्रीय कैमलिड्स वर्ष 2024 का उद्देश्य ऊंट के इस्तेमाल के बारे में जागरूकता पैदा करना है. इसके तहत ऊंट क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की क्षमता, रिसर्च की की वकालत और नई प्रथाओं और टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के साथ क्षमता विकास करना है.

अंतर्राष्ट्रीय कैमलिड्स वर्ष मनाने का मुख्य उद्देश्य
● सुरक्षा में ऊंटों की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में जनता और नीति निर्माताओं की जागरूकता बढ़ाना है.
ईको सिस्टम, जैव विविधता का संरक्षण, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना और जलवायु परिवर्तन के अनुकूल होना.
● ऊंटों की इस्तेमाल नहीं हुई क्षमता के बारे में जागरूकता पैदा करना.
● ऊंटों के आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व के बारे में जनता के बीच जागरूकता को बढ़ावा देना.
● उनके सामान की खपत को बढ़ावा देना ताकि भूख, भोजन के उन्मूलन में योगदान दिया जा सके.

यहां डबल कूबड़ वाले ऊंट हैं ज्यादा
बताते चलें कि ऊंट को दो समूहों में बांटा गया है. एक पुरानी दुनिया के ऊंट और दूसरा नई दुनिया के ऊंट. विश्व कैमलिड्स में ड्रोमेडरी ऊंट (कैमलस ड्रोमेडेरियस), बैक्ट्रियन ऊंट (कैमलस) शामिल हैं. ड्रोमेडरी ऊंट को आमतौर पर एकल के रूप में जाना जाता है. ड्रोमेडरी ऊंट मुख्य रूप से अफ्रीका के गर्म शुष्क रेगिस्तान में मौजूद हैं. ड्रोमेडरी आबादी का एक छोटा हिस्सा ऑस्ट्रेलिया में भी मौजूद है लेकिन वर्तमान में जंगली में है बैक्ट्रियन ऊंट को आमतौर पर डबल कूबड़ ऊंट या मंगोलियाई ऊंट के रूप में जाना जाता है. ठंडे रेगिस्तान मंगोलिया, चीन, कजाकिस्तान, ईरान और अफगानिस्तान के क्षेत्र में डबल कूबड़ ऊंट ज्यादा हैं. भारत में लद्दाख की नुब्रा घाटी में लगभग तीन सौ दोहरे कूबड़ वाले ऊंट मौजूद हैं.

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