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डेयरी बिजनेस साल भर देता है इनकम

NDDB के चेयरमैन डॉ. मीनेश शाह ने पांडिचेरी विश्वविद्यालय में आयोजित 'एग्रीकल्चरल इकोनॉमिक्स रिसर्च एसोसिएशन' (AERA) के 34वें वार्षिक सम्मेलन में "भारत में डेयरी उद्योग - ग्रामीण बदलाव की एक कहानी" विषय पर एक विशेष व्याख्यान दिया. इस सत्र की सह-अध्यक्षता ICAR की नेशनल प्रोफेसर डॉ. स्मिता सिरोही और नई दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के 'सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ रीजनल डेवलपमेंट' की प्रोफेसर डॉ. सीमा बाथला ने की. डॉ. शाह ने भारतीय संस्कृति में पशुओं के महत्व और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा स्थायी आजीविका प्रदान करने में डेयरी उद्योग की अहम भूमिका पर प्रकाश डाला. उन्होंने भारत में डेयरी क्षेत्र की शानदार प्रगति का जिक्र करते हुए बताया कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बन गया है, और दूध देश का सबसे बड़ा कृषि उत्पाद है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत का छोटे स्तर वाला और कम लागत वाला डेयरी मॉडल किस तरह साल भर आय का जरिया बनता है, समान विकास को बढ़ावा देता है, और ग्रामीण समृद्धि तथा सामाजिक बदलाव का एक सशक्त माध्यम है.
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बिहार में बकरीपालन को नई दिशा देने की पहल

डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग, बिहार के अंतर्गत बिहार राज्य बकरी पालक सहकारी परिसंघ लिमिटेड (गोट फेडरेशन) के कार्यालय का विधिवत उद्घाटन किया गया. इस अवसर पर गोट फेडरेशन के अध्यक्ष-सह-सचिव, विभागीय सचिव शीर्षत कपिल अशोक, निदेशक, पशुपालन श्रीकांत शास्त्री, प्रबंध निदेशक सुभाष नारायण सहित विभाग के वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे. गोट फेडरेशन के माध्यम से बकरीपालकों को संगठित कर गोट बैंक, पशु मार्ट, मीट कियोस्क एवं गोट रियरिंग फार्म जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की योजना है. यह पहल बकरीपालकों को तकनीकी मार्गदर्शन, बेहतर विपणन सुविधाएँ एवं बाजार संपर्क उपलब्ध कराने के साथ उनकी आय वृद्धि और ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.




