नई दिल्ली. अक्सर पशु जब बीमार पड़ जाता है तो पशुपालक खुद से ही इलाज करना शुरू कर देते हैं. इससे पशु को जो जरूरी इलाज चाहिए होता है इससे उसमें देरी हो जाती है. जबकि पशु को सही समय पर यदि इलाज न मिले तो उसकी परेशानी बढ़ जाती है. एक तो उत्पादन प्रभावित होता ही है दूसरा पशु जब ज्यादा बीमार पड़ जाता है तो इलाज पर आने वाले खर्च की वजह से पशुपालन की लागत बढ़ जाती है. इसलिए समझदारी इसी में है कि पशु जब बीमार हो तो इलाज में देर न करें. इसके लिए आईजीआरएस का इस्तेमाल न करें.
इसपर पर शिकायत न करें तत्काल पशु चिकित्सा सेवा लें. असल में आईजीआरएस पशुओं के तत्काल इलाज के लिए बनाई गई व्यवस्था नहीं है. यह शिकायतों के निस्तारण की प्रणाली है, जिसमें 10 दिन, 15 दिन या एक माह तक का समय लग सकता है इतनी देर में बीमार पशु की हालत गंभीर हो सकती है और पशु की जान भी जा सकती है.
नजदीकी पशु चिकित्सालय सबसे बेहतर विकल्प है
पशु के बीमार पड़ते ही तुरंत संपर्क करें. इसके लिए नजदीकी पशु चिकित्सालय सबसे बेहतर आप्शन है.
इसके अलावा आप नजदीकी पशु सेवा केंद्र से संपर्क कर सकते हैं. इसके लिए 1962 टोल-फ्री नंबर का इस्तेमाल करें.
1962 टोल-फ्री नंबर पर कॉल करें और पशु चिकित्सा सेवा आसानी से हासिल की जा सकती है.
यदि पशु चिकित्सा सेवा प्राप्त करने में कोई समस्या आती है, चिकित्सक उपल्ब्ध नहीं है.
सेवा में व्यवधान है या आपकी शिकायत का समधान नहीं हो रहा है, तब उस समस्या के निवारण के लिए आईजीआरएस पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है.
लेकिन आईजीआरएस को पशु के इलाज का माध्यम न समझें. जैसे हम स्वयं बीमार होने पर तत्काल डॉक्टर, अस्पताल या चिकित्सा सेवा से संपर्क करते हैं.
इलाज के लिए शिकायत निवारण प्रणाली की प्रतीक्षा नहीं करते, उसी प्रकार हमारे पशु भी बीमारी की स्थिति में समय पर चिकित्सा और उपचार के हकदार हैं.
एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि समय पर उपचार से न सिर्फ पशु का जीवन बचता है बल्कि पशु के इलाज पर खर्च भी कम आता है.
निष्कर्ष
इसलिए पशु बीमार हो तो इलाज में देर न करें तत्काल पशु का इलाज कराएं और पशु का उत्पादन प्रभावित होने के साथ ही खुद को नुकसान से भी बचाएं.












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