Home मछली पालन Fish Farming: ऑर्नामेंटल फिश की किस तरह करें देखरेख, यहां पढ़ें ध्यान देने वाली अहम बातें और सावधानियां
मछली पालन

Fish Farming: ऑर्नामेंटल फिश की किस तरह करें देखरेख, यहां पढ़ें ध्यान देने वाली अहम बातें और सावधानियां

फिश एक्वेरियम की मछलियां बेहद ही संवेदनशील होती हैं.
प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. ऑर्नामेंटल फिश, जिसे सजावटी मछली कहते हैं, उसकी भी देखभाल की जरूरत होती है. अगर उसकी समय-समय पर देखभाल न की जाए तो फिर मुश्किलें हो सकती हैं. मछलियों को बीमारियां लग सकती हैं और फिर उनकी मौत हो सकती है. ऑर्नामेंटल फिश के एक्सपर्ट कहते हैं कि मछलियां जिस शीशे के बॉक्स में रहती हैं उनकी साफ-सफाई भी बहुत अहम है. ये उनकी देखभाल का ही हिस्सा है. एक्वेरियम के पानी को भी साफ करते रहना चाहिए. क्योंकि पानी में कई ऐसी चीजें पनप जाती हैं तो मछलियों के लिए नुकसानदेह है.

इस आर्टिकल में हम आपको ऑर्नामेंटल फिश की किस तरह से देखरेख की जाती है कि ताकि वो बीमार न पड़े और उनमें मृत्युदर न देखी जाए, इसकी जानकारी यहां देने जा रहे हैं. पूरे आर्टिकल को पढ़ें और इस बारे में जानें.

ध्यान देने वाली अहम बातें यहां पढ़ें
नियमित जल परिवर्तन करना चाहिए. हर दो या चार हफ्ते में 20-30 फीसदी पानी बदल दें.
समय-समय पर कांच से शैवाल के मैल की सफाई करते रहना चाहिए.
एक्वेरियम के अंदर मरी हुई मछलियां दिखाई देने पर उन्हें हटा देना बेहतर होता है.
सब्सट्रेट की सतह परत को रैक करना और गंदगी को हटा देने की सलाह एक्सपर्ट देते हैं.
ध्यान में आने पर अतिरिक्त पौधों की ग्रोथ की छंटाई समय-समय पर करते रहना चाहिए.
यदि एक या दो महीने के बाद एक्वेरियम का पानी गंदा हो जाता है, तो पानी बदल दें.
वाष्पीकरण के कारण होने वाली पानी की कमी की भरपाई जरूर करनी चाहिए.

एक्वारियम के रखरखाव बरतें सावधानियां
ऐसा कभी भी न करें कि लंबे समय से आपने एक्वेरियम को देखा ही न हो.
एक्वेरियम की मछलियों को जरूरत से ज्यादा न खिलाएं.
एक बार एक्वेरियम सेट और संतुलित हो जाए तो पानी नहीं बदलना चाहिए.
जब तक कि यह गंदा या बदबूदार न हो जाए. या जब पानी का स्तर गिरता रहे तब.
समय के साथ, इसमें कुछ वर्षा जल मिलाकर इसे बहाल किया जाना चाहिए.
मछलियों की अधिक भीड़ लगाने से हमेशा बचना चाहिए. कम मछलियां रखना ठीक है.
ट्रॉपिकल मछलियों के लिए, तापमान लगभग 720 फार्रेनहाइट और पीएच लगभग 7-7.2 आडियल है.
एक्वेरियम का पानी बदलने में लगातार प्रवाह होना चाहिए. ट्यूबों की सहायता से रखरखाव किया जाता है.
एरेटर को भी बार-बार चलाया जाना चाहिए.
मछलियों को एक्वेरियम में रखने से पहले उन्हें KMnO4 या CuSO4 से नहलाना चाहिए.
एक्वेरियम में उसकी क्षमता का लगभग तीन चौथाई पानी भरा होना चाहिए.
एक ही प्रकार के भोजन का प्रयोग नहीं करना चाहिए.
संक्रमित मछलियों को तुरंत हटा देना चाहिए.
एक्वेरियम में हमेशा एक ढक्कन होना चाहिए.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Related Articles

The State-wise number of coastal fishermen villages for development as Climate Resilient Coastal Fishermen Villages are envisaged in proportion to the total number of coastal fishermen villages in the State and at present
मछली पालनसरकारी स्की‍म

Fisheries: जलीय कृषि बीमा से मछली पालन में नुकसान की होती भरपाई

नई दिल्ली. जलीय कृषि बीमा यानि एक्वाकल्चर इंश्योरेंस एक तरह की वित्तीय...

shrimp farming in india
मछली पालन

Seafood Export: चीन और यूरोपीय संघ के सीफूड निर्यात मूल में 22 और 37 फीसद की बढ़ोतरी

नई दिल्ली. देश में सीफूड एक्सपोर्ट (Seafood Export) लगातार बढ़ रहा है....

shrimp farming problems
मछली पालन

Fisheries: टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने से भीमावरम फिशरीज क्लस्टर होगा मजबूत

नई दिल्ली. नेशनल फिशरीज डेवलपमेंट बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. बिजय...