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Poultry: मुर्गी पालन में ज्यादा मुनाफा चाहते हैं तो वैक्सीनेशन जरूर करें

मुर्गियों के रहने की जगह को साफ-सुथरा रखना चाहिए.
प्रतीकात्मक तस्वीर का प्रयोग किया गया है।

नई दिल्ली. क्या आप भी मुर्गी पालक हैं और मुर्गी पालन में वैक्सीनेशन को लेकर दुविधा में हैं तो फिर परेशान होने की जरूरत नहीं है. आज आपकी मुश्किल इस रिपोर्ट को पढ़ने के बाद हल हो जाएगी. सबसे पहले तो ये जान लें कि मुर्गी पालन बेहतरीन काम है लेकिन इसमें कई बीमारियां, इस काम को अर्श से फर्श पर ला देती हैं. इसलिए बीमारियों से बचाव बेहद ही जरूरी है. एक्सपर्ट का कहना है कि बीमारी को इसके आने के बाद दूर करने की बजाय पहले से ही बचाव कर लिया जाए ताकि मुर्गियां बीमार न हों और नुकसान भी न उठाना पड़े.

एक्सपर्ट का कहना है कि ये तभी संभव होगा जब मुर्गियों को खतरनाक बीमारियों से बचाने के लिए समय से वक्सीन लगाई जाएगी. बिना वैक्सीनेशन किए बीमारियों से बचाना बेहद ही मुश्किल काम है. इसलिए वैक्सीनेशन पर पोल्ट्री फार्मर्स को ध्यान देना चाहिए.

वैक्सीनेशन क्यों जरूरी है
स्वस्थ मुर्गी सुरक्षित उत्पादन अधिक मुनाफा कमाने के लिए जरूरी है.

मुर्गियों को कई तरह की संक्रामक बीमारियों होती हैं, जो तेजी से फैलती हैं और भारी नुकसान करती हैं.

वैक्सीनेशन इन बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है.

टीकाकरण बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करता है.

मृत्यु दर (Mortality) को कम करता है.

अच्छी ग्रोथ और अधिक वजन मिलता है.

अंडों का उत्पादन बढ़ता है.

दवा पर खर्च और आर्थिक नुकसान कम होता है.

झुंड स्वस्थ रहता है और पालन आसान होता है.

समय पर टीका लगेगा तो झुंड बचेगा मुनाफा भी बढ़ेगा.

वैक्सीनेशन से किन बीमारियों से बचाव होता है
रानीखेत (Newcastle Disease)

गंम्बोरा (IBD)

फाउल पॉक्स (Fowl Pox)

बर्ड फ्लू (Avian Influenza)

मारेके रोग (Marek’s Disease)

वैक्सीनेशन 5-7 दिन, 14, 21, 28 दिन पर करें. वहीं 5-6 सप्ताह और 8-10 सप्ताह पर भी करें.

रानीखेत (F1) आंख, नाक से ड्रॉप से डालें.

गंबोरो (IBD) के लिए पानी के साथ दें.

रानीखेत (Lasota) पानी के साथ दें.

फाउल पॉक्स पंखों के नीचे लगाएं.

रानीखेत (R2B) पानी के साथ

बर्ड फ्लू (AI) पानी के साथ

ध्यान रखने योग्य बातें ये हैं कि टीका हमेशा ठंडी जगह पर रखें.

एक्सपायरी डेट देख कर ही उपयोग करें.

टीका उपयोग से पहले अच्छी तरह हिलाएं.

साफ पानी और साफ उपकरण का प्रयोग करें.

बीमार मुर्गी को अलग रखें और पशु चिकित्सक से संपर्क करें.

निष्कर्ष
वैक्सीनेशन प्रोग्राम के अनुसार समय में बदलाव संभव है. अपने पशु चिकित्सक की सलाह अवश्य लें. इससे मुर्गी पालन में आपको नुकसान नहीं होगा.

Written by
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