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Fish Farmers: फिशरीज सेक्टर के लिए इसरो ने जहाजों की निगरानी और नियंत्रण को तैयार किया ऐप

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मछली पकड़ते मछुआरे (फोटो CMFRI)

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत मत्स्य पालन बंदरगाहों और मछलियों के उतारने वाले केंद्रों का विकास किया जा रहा है. भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत पोत संचार और सहायता प्रणाली (वीसीएसएस) के लिए राष्ट्रीय रोल-आउट योजना को 364 करोड़ की कुल लागत पर मंजूरी दी है. इस परियोजना में एक लाख समुद्री मछली पकड़ने वाले जहाजों में ट्रांसपोंडर लगाना, आवश्यक अर्थ स्टेशन और संबद्ध संचार अवसंरचना की स्थापना तथा क्षेत्रीय भाषाओं में ‘नभमित्र’ एप्लिकेशन का विकास शामिल है.

इस परियोजना के तहत पात्र मछुआरों को ट्रांसपोंडर निःशुल्क प्रदान किए जाते हैं. यह परियोजना केंद्र सरकार और राज्यों के बीच 60:40 लागत-साझाकरण के आधार पर कार्यान्वित की जाती है, जबकि केंद्र शासित प्रदेशों को 100 फीसद केंद्रीय वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है. पोत संचार और सहायता प्रणाली (वीसीएसएस) को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा समुद्री मछली पकड़ने वाले जहाजों की निगरानी, नियंत्रण और निगरानी को सक्षम करने के लिए स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है.

ऐप भी किया गया है विकसित
वीसीएसएस के भाग के रूप में, इसरो ने समुद्री मछुआरा समुदाय का समर्थन करने के लिए ‘नभमित्र’ एप्लिकेशन विकसित किया है.

इस एप्लिकेशन की प्रमुख विशेषताओं और क्षमताओं में आवधिक स्थिति रिपोर्टिंग, दो-तरफा संदेश, आपातकालीन/एसओएस संदेश, स्वचालित सीमा उल्लंघन अलर्ट (जियो-फेंसिंग पर आधारित है.

इसमें मौसम और चक्रवात चेतावनियां, आपातकालीन मौसम अलर्ट, संभावित मत्स्य क्षेत्र (पीएफजेड) सलाह, नौवहन सहायता तथा एक ई-टोकन, यात्रा घोषणा प्रणाली शामिल हैं.

तटीय राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों ने समुद्री मत्स्य पालन विनियमन अधिनियमों (एमएफआरए) के प्रावधानों के तहत अपने-अपने अधिकार क्षेत्रों में मत्स्य अवतरण केंद्रों को अधिसूचित किया है.

कुल 1547 अधिसूचित समुद्री मत्स्य अवतरण केंद्रों में से 423 अधिसूचित मत्स्य अवतरण केंद्रों (एफएलसी) को अवसंरचना विकास पहलों के तहत शामिल किया गया है.

एफएलसी को अवसंरचना विकास के लिए संबंधित राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों की प्राथमिकताओं के आधार पर विचार किया जाता है.

जिसमें परिचालित मछली पकड़ने वाले जहाजों की संख्या, केंद्र पर निर्भर मछुआरों की संख्या, मछली अवतरण की मात्रा, मछली बाजारों और प्रसंस्करण केंद्रों से निकटता, तथा अन्य स्थानीय आवश्यकताओं जैसे कारकों के साथ-साथ तकनीकी-वित्तीय व्यवहार्यता और वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता है.

साथ ही वैधानिक प्रावधानों के अनुपालन को शामिल किया जाता है. अधिसूचित मत्स्य अवतरण केंद्रों (एफएलसी) की संख्या का राज्य/केंद्र शासित प्रदेश-वार विवरण अनुबंध-I में दिया गया है.

मत्स्य अवतरण केंद्रों (एफएलसी) पर सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और सुरक्षा व्यवस्था संबंधित राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों द्वारा संबंधित सुरक्षा और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के समन्वय से, स्थल-विशिष्ट परिस्थितियों, संवेदनशीलताओं और अन्य स्थानीय कारकों के आधार पर की जाती है.

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