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Animal Husbandry: भैंस के प्रजनन से जुड़ी हर अहम बात यहां पढ़ें, जानें पशुपालकों क्या-क्या करना चाहिए

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प्रतीकात्मक फोटो.

नई दिल्ली. पशु पालन करने के लिए कई बातों का ध्यान देना जरूरी होता है. पशुपालक को अपने पशु के प्रजनन के बारे में भी जानकारी होना चाहिए. मसलन, अगर भैंस गाभिन है तो उसे कितना चारा चाहिए? ताकि उसकी ज़रूरतें पूरी हो सकें. उन्हें कितना पानी देने की आवश्यकता है. इन तमाम बातों का जानना भी जरूरी है. इसके अलावा प्रजनन से पहले भी कुछ बातें हैं, जिनका ध्यान देना जरूरी होता है. भैंस को कैसे गाभिन करना है. कब दूध दूहना बंद कर देना है. इसकी भी जानकारी होना बेहद जरूरी है.

अगर पशुपालकों को भैंस के प्रजनन से जुड़ी जानकारी होगी तो इससे भैंस से जो बछड़ा प्राप्त होगा वह स्वस्थ होगा और इसके बाद भैंस अच्छी मात्रा में दूध भी उत्पादन करेगी. अगर जानकारी नहीं हुई तो कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं. इस आर्टिकल में हम आपको 8 पॉइंट में यह बताने वाले हैं कि प्रजनन के दौरान भैंस का किस तरह से ख्याल रखा जाना चाहिए. आईए जानते लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विवि की ओर से जारी कलेंडर में दी गई अहम बातों को.

  1. पहले प्रजनन के समय पशु का शारीरिक वजन उसके व्यस्क शारीरिक वजन का 60-70 प्रतिशत होना चाहिए.
  2. पशु एक्सपर्ट कहते हैं कि आमतौर पर भैंस हर 21 वें (18-24) दिन गर्मी में आती है.
  3. अधिकांश पशु (60-70 प्रतिशत) गर्मी में सांय 6 बजे से प्रातः 6 बजे के बीच आते हैं इसलिए पशुपालक को पशुओं को गर्मी में देखने के लिए कम से कम 24 घंटों में 3-4 बार जाँच जरूर करनी चाहिए.
  4. भैंस को कृत्रिम गर्भाधान या उच्च कोटि के सांड से गाभिन कराना चाहिए.
  5. गर्भाधान से 2-3 महीनों के बाद गर्भावस्था की जाँच अवश्य करवायें.
  6. भैंस में गर्भावस्था लगभग 300 दिन (290-310) की होती है.
  7. पशु समय से गर्म तथा गर्भित हो इसके लिए उसे संतुलित आहार देना चाहिए. इसमें खनिज मिश्रण का विशेष महत्त्व है.
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  8. ब्याने से अनुमानित तिथि में कम से कम दो महीने पहले ही दूध दुहना बंद कर दें ताकि अगले ब्यांत में दूध उत्पादन की वृद्धि व कटड़े-कटड़ी का सही विकास हो सके.

पशु एक्सपर्ट के मुताबिक पशुपालन अब एक बेहद ही मुनाफे वाला व्यवसाय बन चुका है. वो किसान जिनके पास जमीन ज्यादा नहीं है वो पशुपालन करके अच्छी खासी इनकम हासिल कर रहे हैं. किसान पशुपालन करें और इसके लिए प्रेरित करने के लिए सरकार भी सब्सिडी उपलब्ध कराती है. सरकार चाहती है कि किसानों की आय पशुपालन से दोगुनी की जाए. इसलिए सरकार समय-सयम पर कई योजनाएं लाती रहती है.

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