Home पशुपालन Goat Farming: खास हैं महाराष्ट्र की ये 3 नस्ल की बकरियां, पशुपालक करते हैं लाखों में कमाई
पशुपालन

Goat Farming: खास हैं महाराष्ट्र की ये 3 नस्ल की बकरियां, पशुपालक करते हैं लाखों में कमाई

goat farming
उस्मानाबादी, ​संगमनेरी और सिरोही नस्ल की बकरी की तस्वीर.

नई दिल्ली. बकरी पालन एक ऐसा व्यवसाय है, जिसे बहुत कम पूंजी और छोटी जगह में आसानी के साथ किया जा सकता है. बकरी छोटे आकार की पशु होती है. इसका पालन बेहद आसान माना गया है. सीमांत और भूमिहीन किसानों द्वारा दूध तथा मांस के लिए बकरी का पालन किया जाता है. इसके अलावा बकरी की खाल, बाल और रेशों का व्यवसायिक महत्व बहुत है. इसे पालने वाले किसान इन चीजों से भी अच्छी खासी आमदनी हासिल करते हैं. बकरी पालन को छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है.

10 बकरियां और एक बकरे से इसकी शुरुआत की जा सकती है और बाद में बकरियों की संख्या 20 तक बढ़ाई जा सकती है. इसी तरह से 20 बकरियों पर एक बकरा और 40 बकरियों पर दो बकरियों की दर से व्यवसाय शुरू हो सकता है. देश में विभिन्न राज्यों में कई नस्लों की बकरियां का पालन किया जाता है. जिसमें महाराष्ट्र की सिरोही, उस्मानाबादी और संगमनेरी देश अलग-अलग कोनों में पाली जाती हैं. यह बकरियां न सिर्फ महाराष्ट्र राज्य के किसानों के लिए बेहतरीन कारोबार का जरिया हैं बल्कि अन्य जगहों पर भी इसे पाला जाता है. आईए जानते हैं इन तीन खास बकरियों की खासियत

उस्मानाबादी नस्ल की बकरी
उस्मानाबादी नस्ल मुख्य रूप से महाराष्ट्र के ओसर्नाबाद जिले के लातूर, तुलजापुर और उदगीर तालुकों की मानी जाती है. ये बकरियां आकार में बड़ी होती हैं, रंग अलग-अलग होता है, लेकिन (73%) फीसदी काली रंग की होती है और बाकी सफेद, भूरे या धब्बेदार होती हैं. 90 प्रतिशत नर होमड होते हैं, मादा होमड या पोल्ड हो सकती हैं. यह नस्ल मांस और दूध दोनों के लिए उपयोगी मानी जाती है. लगभग चार महीने की स्तनपान अवधि के लिए औसत दैनिक उपज 0.5 से 1.5 किलोग्राम दूध उत्पादन करती हैं. ड्रेसिंग का प्रतिशत 45 से 50 तक होता है. अगर अनुकूल परिस्थितियां मिल जाएं तो साल में दो बार नियमित रूप से प्रजनन करती हैं और जुड़वां बच्चे होना आम बात है.

संगमनेरी बकरी
संगमनेरी नस्ल आमतौर पर महाराष्ट्र के पूना और अहर्नेडनगर जिलों में पाई जाती है. ये पशु मध्यम आकार के होते हैं. उनका कोई एक समान रंग नहीं होता है. ये बकरियां सफेद, काले या भूरे रंग के अलावा अन्य रंगों के धब्बों के साथ अलग होती हैं. पहचान के तौर पर कान झुक रहते हैं. आमतौर पर औसतन हर दिन 0.5 से 1.0 किलोग्राम के बीच दूध का प्रोडक्शन करती हैं. औसत स्तनपान अवधि लगभग 165 दिन होती है. 6 महीने में ड्रेसिंग प्रतिशत लगभग 41 फीसदी होता है. 9 महीने में 45 फीसदी और 12 महीने की उम्र में 46 परसेंट होता है.

सिरोही नस्ल की बकरी
सिरोही नस्ल की बकरी की बात की जाए तो कोट का रंग भूरा, सफेद और विशिष्ट पैच में रंगों का मिश्रण होता है. इनके बाल मोटे और छोटे होते हैं. कॉम्पैक्ट और मध्यम आकार का शरीर होता है. पूंछ मुड़ी हुई है और मोटे नुकीले बाल रखती हैं. जबकि सींग छोटे और नुकीले, ऊपर और पीछे की ओर मुड़े हुए होते हैं. नर के शरीर का औसत वजन 50 और मादा का वजन 23 किलोग्राम होता है. जन्म के समय औसत वजन 2.0 किलोग्राम होता है.
साल में एक बार गर्भवती होती हैं और जुड़वां बच्चे होना आम बात है. पहले बच्चे के जन्म की औसत आयु 19 महीने है. औसतन स्तनपान की अवधि 175 दिन होती है और 71 लीटर दूध उत्पादन करती हैं.

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

livestock animal news
पशुपालन

Zoonotic Diseases: पशु-पक्षी के कारण इंसानों को क्यों होती है बीमारियां, यहां पढ़ें मुख्य वजह

जैसे जापानी मस्तिष्क ज्वर, प्लेग, क्यासानूर जंगल रोग, फाइलेरिया, रिलेप्सिंग ज्वर, रिकेटिसिया...

livestock animal news
पशुपालन

Green Fodder: चारा उत्पादन बढ़ाने के लिए क्या उपाय करने चाहिए, पढ़ें यहां

पशुओं के लिए सालभर हरा चारा मिलता रहे. इसमें कोई कमी न...