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Fish Farming: तालाब से खरपतवार को निकालते समय क्या सावधानियां बरती जाएं, पढ़ें यहां

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प्रतीकात्मक फोटो.

नई दिल्ली. मछली पालन को खरपतवार बहुत ही नुकसान पहुंचाता है. जिसमें जलकुंभी भी एक है. ये खरपतवार मछलियों की ग्रोथ नहीं होने देती है. वहीं मछलियों को जो फीड दिया जाता है, वो भी पूरी तरह से मछलियों तक नहीं पहुंच पाता. इस वजह से मछलियों को जरूरी पोषक तत्व भी नहीं मिलता है. ऐसे में जरूरी है कि खरतवार को तालाब से बाहर निकाला जाए. हालांकि इसको निकालने का भी तरीका है. अगर एक्सपर्ट द्वारा बताए गए तरीकों को अपनाकर अगर खरपतवार को बाहर निकाला जाए तो फिर इससे फायदा होगा.

एक्सपर्ट कहते हैं कि जलकुंभी ने मछली पालन, पर्यावरणीय समस्या और हेल्थ को लेकर भी खतरा बढ़ा दिया है. इसकी वजह से जलाशयों को संक्रमित कर पानी की गुणवत्ता को ख़राब करने के साथ-साथ मच्छरों, घोंघे और मानव रोगों से जुड़े अन्य जीवों को पनपने और प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करता है. जिससे मलेरिया, सिस्टोसोमियासिस, एन्सेफलाइटिस, फाइलेरिया और हैंजा आदि रोगों का खतरा बढ़ गया है. आइए जानते हैं कि कैसे खरपतवार को खत्प किया जाए.

इस तरह से खरपतवार का सफाया
आक्रामक खरपतवारों को विभिन्न तरीकों को अपना जैसे के की हाथ से उखाड़कर, मशीनों के द्वारा, जैविक कीटों के द्वारा खत्म किया जा सकता है. वहीं खरपतवार को खत्म करने के लिए कई केमिकल का भी इस्तेमाल किया जाता है. इसके प्रयोग से भी खरपतवार को नियंत्रित किया जा सकता है. हाथ से खरपतवार नियंत्रण किया जाता है. हालांकि जैसे की गाजर घास के नियंत्रण के दौरान सेफ्टी बरतना बहुत ही जरूरी होता है. इस दौरान ऐसी चीजों का इस्तेमाल करना चाहिए जिससे ये खरपतवार हाथों और शरीर के किसी भी हिस्से के संपर्क में न आए. ऐसा हो जाने से बीमारी फैलने का खतरा रहता है.

आंखों पर चश्मा लगा सकते हैं
खरपतवारों को निकालते समय मुंह में मास्क व आंखों में चश्मा अवश्य धारण करें, जिससे की सांस व आँखों सम्बंधित समस्यान्यों से बचाव हो सके. खरपतवारों के जैविक नियंत्रण के लिए बायो एजेंट जाइगोग्रामा स्पी. (गाजरघास के लिए), क्रोसिडोसेमा लेंटाना (जारायन के लिए) का उपयोग करना चाहिए. रासायनिक नियंत्रण के लिए ग्लाइफोसेट, पैराक्वाट व डाईक्वाट आदि अवरणात्मक शाकनाशियों का प्रयोग कर सकते हैं.

जलीय खरपतवार से बचाव
वहीं पानी वाले खरपतवार जैसे की जलकुम्भी के हानिकारक प्रभाव से बचने के लिए जलाशयों के विभिन्न विधियों मानवीय, यांत्रिक, जैविक तथा रासायनिक आदि विधियों द्वारा नियंत्रित कर इनके दुष्प्रभाव से बचा जा सकता हैं. जलकुम्भी के जैविक नियंत्रण के लिए विदेशी वीविल नियोचेटिना ब्रुची का इस्तेमाल किया जा सकता है.

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