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पीएम-सीएम की पहली पसंद क्यों बन रही पुंगनूर गाय, क्या है इसका धार्मिक महत्व, जानें इसकी वजह

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पीएम मोदी और सीएम मोहन यादव गाय को चारा खिलाते हुए.

नई दिल्ली. पुंगनूर गाय दुनिया में सबसे खूबसूरत गायों में शामिल है. हालांकि ये गाय दूध कम मात्रा में देती है. पुंगनूर गाय औसतन 1-3 लीटर दूध ही रोजाना दे पाती है. जबकि ये गाय प्रत्येक दिन करीब पांच किलो चारा खा जाती है. बावजूद इसके ये गाय पीएम-सीएम की पहली पसंद बनती जा रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मध्यचप्रदेश के सीएम मोहन यादव ने भी पुंगनूर गाय को मंगवा लिया है. अब दूसरे प्रदेशों के भी सीएम और मंत्री इस नस्ल की गाय को मंगा सकते हैं. अब लोगों के जहन में होगा कि ये जिस गाय को पीएम और सीएम अपने आवास में रख रहे हैं उनका धार्मिक महत्व क्या है. क्यों इतनी अहम है गाय. अगर आप नहीं जानते तो हम आपको बता देते हैं.

पुंगनूर गाय दुनिया में सबसे खूबसूरत गायों में शामिल है. हालांकि ये गाय दूध कम मात्रा में देती है. पुंगनूर गाय औसतन 1-3 लीटर दूध ही रोजाना दे पाती है. जबकि ये गाय प्रत्येक दिन करीब पांच किलो चारा खा जाती है. मकर संक्राति पर पीएम मोदी की तस्वीर वायरल हुई थी, जिसमें वे खूबसूरत गायों को चारा खिलाते नजर आए थे. अब मध्य प्रदेश के सीमए मोहन यादव भी इस नस्ल की गायों को दुलारते नजर आए. इस संबंध में सीएम मोहन यादव ने अपने X पोस्ट में लिखा ‘आज अत्यंत शुभ दिन है, मंगल बेला है, जब सौभाग्य से निवास पर विशेष प्रजाति की पुंगनूर गाय और नंदी का आंध्र प्रदेश से आगमन हुआ है.

वैदिक काल में भी ये नस्ल
डॉक्टर कृष्णम राजू ने बताया कि असली पुंगनूर वैदिक काल में ऋषि वशिष्ठ और विश्वामित्र के समय भी थी. जलवायु परिवर्तन और स्थान के बदलते ही पुंगनूर की ऊंचाई भी बढ़ती चली गई. पहले भी इस गाय की ऊंचाई ढाई से तीन फीट होती थी और पुंगनूर को ब्रह्मा नस्ल कहा जाता था. पुंगनूर गाय के दूध में वसा की मात्रा अधिक होती है. इसका दूध औषधीय गुणों से भरपूर होता है. पुंगनूर नस्ल के दूध में 8 प्रतिशत वसा होता है जबकि​ सामान्य गायों के दूध में वसा की मात्रा 3 से 3.5 प्रतिशत तक ही होती है.

आंध्र प्रदेश में हो रहा इस नस्ल पर काम
इस गाय की नस्ल पर आंध प्रदेश के काकीनाडा में एक डॉक्टर ने लगातार 14 साल काम किया. काम करने के बाद इसकी नस्ल में सुधार किया गया. पुंगनूर गाय को अन्य गायों में सबसे छोटे की कद की गाय माना जाता है. सामान्यतौर पर इसकी ऊंचाई तीन से पांच फीट के बीच होती है जबकि लघु पुंगनुर की ऊंचाई ढाई फीट होती है. जबकि काकीनाडा के डॉक्टर कृष्णम राजू ने नस्ल सुधार के बाद ढाई फीट की पुंगनूर गाय को विकसित किया है. वे नाड़ीपति नाम से एक गोशाला का संचालन भी करते हैं.

जन्म के दौरान इसकी ऊंचाई महज 7 से 12 इंच
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार डॉक्टर कृष्णम राजू ने बताया कि पुंगनूर गाय दुनिया में सबसे खूबसूरत गायों में शामिल है. जब इसका जन्म होता है तो उसकी ऊंचाई महज 16 से 22 इंच तक होती है और लघु पुंगनूर की ऊंचाई महज 7 से 12 इंच तक होती है. डॉक्टर राजू बताते हैं कि पुंगनूर गाय की नस्ल 112 साल पुरानी नस्ल है जबकि मिनिएचर पुंगनूर का 2019 में विकसित किया गया.

पुंगनूर गाय में तीसरी सबसे कम संख्या वाली नस्ल
डॉक्टर राजू बताते हैं कि पशुधन जनसंख्या-2013 के मुताबिक, आंध्र प्रदेश में पुंगनूर गायों की संख्या सिर्फ 2,772 थी, जब इस पर काम हुआ तो 2019 में की गई 20वीं पशुधन जनगणना और‍ एनबीएजीआर के आंकड़ों के अनुसार पुंगनूर गायों की संख्या 13275 हो गई है.गौरतलब है कि पुंगनूर भारत में सबसे कम संख्या वाली गायों की नस्लों में तीसरे नंबर है. जबकि सबसे कम 5264 बेलाही नस्ल की गाय है और दूसरे नंबर 13934 पणिकुलम गाय है.

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