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सरकारी स्की‍म

Betel Farming के लिए सरकार कर रही किसानों की मदद, पढ़ें डिटेल

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प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश में पान की खासी डिमांड है. इसी मांग को देखते हुए अब यूपी सरकार ने इसकी खेती को बढ़ावा देने का काम भी शुरू कर दिया है. पान की खेती को बढ़ावा देने के मकसद से योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने सब्सिडी सुविधा भी देने का फैसला किया है. ताकि किसान इसकी खेती करें और और मुनाफा हासिल कर सकें. बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से किसानों को 75 हजार रुपये की सब्सिडी दी जा रही है. पूरी स्कीम के बारे में आपको बताते हैं.

कितनी लागत आती है
पान की खेती के लिए 1500 वर्ग मीटर में हर एक बरेजा को बनाने में 151360 रुपये की लागत आती है. जिसका 50 फीसदी सरकार की ओर से किसानों को देने की बात कही गई है. किसानों को 75680 रुपए सरकार मुहैया कराएगी. बाकी के बचा हुआ पैसा किसानों को खुद ही देना होगा. वहीं जिलेवार बरेजा निर्माण के लिए निर्धारित भौतिक लक्ष्य के आधार पर 12 जिलों में कुल 63 बरेजा का निर्माण किया जाना है.

तकनीकि सहायता दी जाएगी
यूपी सरकार की योजना के तहत पान की देसी बांग्ला कलकतिया, कपूरी रामटेक, मगही और बनारसी आदि उन्नतशील प्रजातियों की खेती पर अनुदान देने की बात कही गई है. कोई भी किसान इन किस्म की खेती करता है तो उसे इस योजना का फायदा मिलेगा. इस कार्यक्रम की सफलता के लिए किसानों को पान की खेती की तकनीकी जानकारी के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाएगा. वहीं तकनीकी जानकारी तक पहुंच को आसान बनाने के मकसद से उन्हें तकनीकि सहायता भी प्रदान करने की बात कही गई है.

प्रशिक्षण भी दिया जाएगा
कहा जा रहा है कि प्रशिक्षण के लिए चयनित जिलों के चयनित लाभार्थियों के लिए विभागीय अनुसंधान केंद्र पर प्रशिक्षण का आयोजन किया जाएगा. जिसमें पान अनुसंधान केंदा्रें के वैज्ञानिकों, पान विशेषज्ञों और भारत सरकार के संस्थानों के पान विशेषज्ञों को बुलाया जाएगा. किसानों को पान की खेती के लिए प्रोत्साहित करने के लिए अनुसंधान केंद्र पर प्रचार प्रसार के लिए साहित्य की व्यवस्था की जाएगी.

किसानों को भरना होगा कॉन्ट्रैक्ट लेटर
अनुदान का पूरा पैसा किसानों के खाते में सीधे तौर पर जमा करने की बात कही गई है. इस संबंध में लाभार्थी किसानों को एक कॉन्ट्रैक्ट लेटर भी भरना होगा. यदि अनुदान में हासिल राशि का इस्तेमाल पान की खेती में नहीं किया जाता तो सब्सिडी राशि वापस देनी होगी. यदि लाभार्थी द्वारा पान के अनुसार कार्य नहीं किया जाता तो इस संबंध में जनपद के जिला अधिकारी से अनुमति प्राप्त कर वसूली सुनिश्चित किया जाएगी.

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