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Animal Husbandry: रेगिस्तान में गिद्धो का ऐसे कर सकते हैं संरक्षण, रजवासु ने बताए ये तरीके

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वेटरनरी विश्वविद्यालय में हुए सेमिनार

नई दिल्ली. वेटरनरी विश्वविद्यालय के वन्य जीव प्रबन्धन और स्वास्थ्य केन्द्र तथा बोम्बे नेचुरल हीस्ट्री सोसाईटी के संयुक्त तत्वावधान में “रेगिस्तान में गिद्धो और अन्य वन्य जीवो के प्रति संवेदीकरण एवं संरक्षण” के लिए दो दिवसीय कार्यशाला को उद्घाटन शुक्रवार को किया गया. निदेशक बोम्बे नेचुरल हीस्ट्री सोसाईटी किशोर रिथे कार्यशाला के मुख्य अतिथि तथा संदीप चालानी उप संरक्षण वन एवं वन्यजीव, बीकानेर तथा डॉ. एस.पी. जोशी, संयुक्त निदेशक पशुपालन विभाग, बीकानेर विशेष अतिथि रहे.

ऐसे कर सकते हैं गिद्धों का संरक्षण
अधिष्ठाता प्रो. एपी सिंह ने स्वागत भाषण दिया एवं कार्यशाला के महत्व पर प्रकाश डाला. प्रति कुलपति प्रो. हेमंत दाधीच ने वन्य जीवो एवं गिद्धों के प्रति आमजन में इनके संरक्षण के प्रति संवेदना उत्पन्न करने की आवश्यकता जताई तथा ग़िद्धो का प्राकृतिक संतुलन में महत्व को बताया. मुख्य अतिथि किशोर रिथे ने देश के विभिन्न राज्यो में उनकी संस्थान द्वारा वन्य जीव संरक्षण के कार्यों की जानकारी दी. विश्वविद्यालयों के माध्यम से वन्य जीव संरक्षण विषय पर लघु पाठ्यक्रमों को शुरू करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला. संदीप चालानी ने जोड़बीड क्षेत्र में गिद्ध संरक्षण हेतु उनकी संस्थान द्वारा कार्यों का प्रजेटेशन किया तथा पशुचिकित्सकों की वन्यजीव संरक्षण में भूमिका पर अपने विचार प्रस्तुत किए.

वन्य जीवों के स्वास्थ्य, खान-पान के तरीके बताए
डॉ. एस.पी. जोशी ने गिद्धों के साथ-साथ चिंकारा आदि अन्य वन्य जीवों के संरक्षण की भी आवश्यकता जताई. कार्यशाला के समन्वयक डॉ. साकार पालेचा ने बताया कि दो दिनों की कार्यशाला के दौरान विभिन्न वक्ताओं द्वारा वन्य जीवों के स्वास्थ्य, खान-पान, रखरखाव, इनको विस्थापित करने एवं संरक्षण करने के तरीकों, वन्य जीव पुनर्वास आदि विषयों पर व्याख्यान प्रस्तुत किए जाएंगे.

सेमिनार में ये लोग रहे मौजूद
कार्यशाला में राजस्थान के साथ-साथ अन्य राज्यों के कुल 125 प्रतिभागी भाग ले रहे है. डॉ. सुजीत नारवाडे (बी.एन.एच.एस.) ने धन्यवाद ज्ञापित किया. कार्यक्रम के दौरान मंच संचालन डॉ. प्रतिष्ठा शर्मा ने किया. उद्घाटन सत्र में विश्वविद्यालय के डीन-डॉयरेक्टर, शिक्षक एवं विद्यार्थियों के साथ-साथ डॉ. श्रवण सिंह राठौड़, डॉ. कजवीन उमरीगर, हेमन्त वाजपयी, सचिन रानाडे, डॉ. अनिल कुमार छंगाणी, जीतु सोलंकी आदि वन्यजीव संरक्षण से जुडे विशेषज्ञ उपस्थित रहे.

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