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Sugar: चीनी मिल की खोई से बनेगी गिट्टी, ​थर्मल पावर प्लांट होगी सप्लाई, गन्ना उत्पादकों के लिए अच्छी खबर

गन्ने और शुगर मिली की प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार ने चीनी मिलों में चीनी बैग्स पर ऑनलाइन मार्किंग करने की बात कही है. साथ ही अब हरियाणा प्रदेश की सहकारी चीनी मिलों में गन्ना पेराई के बाद बचने वाली खोई की गिट्टी बनाई जाएगी. इस गिट्टी को थर्मल पावर प्लांट को दिया जाएगा. इसके लिए सभी 7 सहकारी चीनी मिलों में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) पर प्लांट लगाने की बात कही गई है. शुगर फेडरेशन जल्द ही एक कार्य योजना तैयार करेगा. ये सारे काम सहकारिता मंत्री डॉ अरविंद शर्मा के निर्देश पर किए जा रहे हैं. बता दें कि हर बैग पर सीरीयल नंबर, बैच संख्या, चीनी उत्पादन व चीनी भराई की तारीख भी दर्ज की जाएगी.

ये बातें खुद सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने शुगर फेडरेशन और इससे जुड़ी सहकारी चीनी मिलों के संबंध में आयोजित की गई समीक्षा बैठक के बाद पत्रकारों से ​बातचीत के दौरान कही है.

343 लाख क्विंटल गन्ना पेराई का टारगेट
उन्होंने कहा कि राज्य में सहकारी चीनी मिलों में व्यवस्था सुधार किया जा रहा है. पेराई सत्र वर्ष 2024-25 के दौरान 303.81 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की गई है.

जबकि सभी गन्ना उत्पादक किसानों को 1210 करोड़ रुपए जारी कर दिया गया है. आगामी पेराई सत्र वर्ष 2025-26 के लिए सहकारी चीनी मिलों में 343 लाख क्विंटल गन्ना पेराई का लक्ष्य रखा गया है.

सहकारिता मंत्री डॉ अरविंद शर्मा ने कहा कि सहकारी चीनी मिल करनाल, गोहाना, सोनीपत, जींद, पलवल, महम व कैथल में गन्ना पेराई होने के बाद बचने वाली खोई से गिट्टी तैयार किया जाएगा.

इसके लिए पीपीपी मोड पर प्लांट लगेंगे. जिसका थर्मल पावर प्लांट में इस्तेमाल किया जाएगा. उन्होंने आगे कहा कि सहकारी चीनी मिल पानीपत में 150 करोड रुपए की लागत से एथनॉल प्लांट लगाया जाएगा, जिसके लिए जल्द टेंडर लगाया जा रहा है.

उन्होंने किसानों संवाद करने और 5 साल पुराने गन्ना उत्पादक किसानों को फिर से मिल के साथ जोड़े जाने की बात​ कही है.

साथ ही मिलों के घटे पर बिजली उत्पादन बढ़ाने वाले रास्ते की तलाश पर जोर दिया. कहा कि भविष्य में सहकारी चीनी मिलों के टेंडर एक साथ व एक समान नियमों के अनुरूप ही लगाए जाएंगे.

गन्ना किसानों की परेशानी को दूर करने के लिए कृषि विभाग के साथ मिलकर हार्वेस्टिंग मशीन सब्सिडी पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था बनवाने का निर्देश दिया.

अधिकारियों द्वारा विस्तृत तरीके से फेडरेशन व सहकारी चीनी मिलों के बारे रिपोर्ट पेश की गई.

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