नई दिल्ली. सेंट्रल मरीन फिशरीज रिसर्च इंस्टीट्यूट (CMFRI) को 2021-25 के दौरान ट्रॉलर से होने वाली मछली की पकड़ (लैंडिंग) में कोई खास कमी नहीं मिली है, और भारत के ज्यादातर समुद्री मछली स्टॉक सस्टेनेबल (बनाए रखने योग्य) बने हुए हैं. ओवर कैपेसिटी और मशीनीकृत ट्रॉलरों के बेरोकटोक विस्तार के कारण तटीय बेन्थिक इकोसिस्टम (समुद्र तल के पारिस्थितिकी तंत्र) के खराब होने के बारे में सांसद अब्दुस्सम्मद समदानी के लोकसभा सवाल का जवाब देते हुए, केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि CMFRI के आकलन से इस अवधि के दौरान ट्रॉलर-आधारित मछली लैंडिंग में कोई खास कमी नहीं दिखी.
बता दें कि ट्रॉलर एक बड़े और यंत्रीकृत मछली पकड़ने वाले जहाज को कहते हैं. जिससे समुद्र से भारी मात्रा में पकड़ी गई मछलियों को तट, बंदरगाह या फिश लैंडिंग सेंटर पर उतारा जाता है. इस प्रक्रिया को ही ट्रॉलर-आधारित मछली लैंडिंग कहा जाता है. CMFRI की ‘मरीन फिश स्टॉक स्टेटस ऑफ इंडिया (2022)’ रिपोर्ट के अनुसार, भारत के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (EEZ) के अलग-अलग इलाकों में आंके गए 135 समुद्री मछली स्टॉक में से 91.1 प्रतिशत सस्टेनेबल पाए गए.
लंबे समय तक निगरानी
मंत्री ने कहा कि CMFRI सांख्यिकीय रूप से मान्य और FAO द्वारा सुझाए गए ‘स्ट्रैटिफाइड मल्टी-स्टेज रैंडम सैंपलिंग फ्रेमवर्क’ के ज़रिए समुद्री मत्स्य पालन और इकोसिस्टम की निगरानी करता है.
संस्थान स्टॉक की सेहत का आकलन करने और इकोसिस्टम में बदलावों पर नजर रखने के लिए भारत के 11,000 किलोमीटर लंबे तट पर 1,300 से ज्यादा लैंडिंग सेंटरों से मछली लैंडिंग और मछली पकड़ने की कोशिशों (फिशिंग एफर्ट) का लंबे समय का डेटा इकट्ठा करता है.
उन्होंने आगे कहा कि CMFRI समुद्री जैव विविधता, बेन्थिक इकोसिस्टम की सेहत, ट्रॉफिक इंटरैक्शन और समुद्री इकोसिस्टम पर बॉटम ट्रॉलिंग के असर से जुड़े राष्ट्रीय कार्यक्रम लागू कर रहा है.
पारंपरिक मछुआरों की सुरक्षा के लिए पांच नॉटिकल मील के ‘नो-ट्रॉलिंग जोन’ को लागू करने पर मंत्री ने कहा कि मत्स्य पालन राज्य का विषय है.
तटीय राज्यों ने अपने खुद के समुद्री मत्स्य पालन नियमन कानून (MFRA) बनाए हैं, जो बेसलाइन से 12 नॉटिकल मील तक फैले उनके क्षेत्रीय जलक्षेत्र में मछली पकड़ने की गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं.
ये कानून पारंपरिक और मशीनीकृत नावों के लिए मछली पकड़ने के इलाकों को बांटने, मछली पकड़ने के उपकरणों और जाल के आकार (मेश साइज़) को नियंत्रित करने के लिए है.
इसके अलावा मछली पकड़ने पर मौसमी रोक लगाने, पकड़ी जाने वाली मछलियों के लिए न्यूनतम कानूनी आकार तय करने और नुकसान पहुंचाने वाले तरीकों से मछली पकड़ने पर रोक लगाने का प्रावधान करते हैं.
मंत्री ने पारंपरिक मछुआरों की आजीविका की रक्षा करने और समुद्री मछली के भंडार को बेहतर बनाने के लिए ‘प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना’ (PMMSY) के तहत उठाए गए कदमों पर भी ज़ोर दिया.
इनमें समुद्री कछुओं की सुरक्षा के लिए ट्रॉल जाल में ‘टर्टल एक्सक्लूडर डिवाइस’ लगाना, ‘सी रैंचिंग’ प्रोग्राम और तटीय इलाकों में कृत्रिम चट्टानें (artificial reefs) बनाना शामिल है.
उन्होंने कहा कि इसके अलावा, PMMSY गहरे समुद्र में मछली पकड़ने, खुले समुद्र में केज कल्चर, मैरीकल्चर और समुद्री शैवाल की खेती को बढ़ावा देती है, ताकि तटीय इलाकों में मछली पकड़ने का दबाव कम हो सके.











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