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Fisheries: मछली पालन के जरिए रोजगार के अवसर पैदा करेगी सरकार, पलायन भी रोकने का है प्लान

Under Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana (PMMSY) and Fisheries and Aquaculture Infrastructure Development Fund (FIDF) the Department of Fisheries has approved the development of post-harvest interface viz- cold storage, fish processing and Marketing infrastructure.
प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. बिहार में पलायन एक बड़ी समस्या है. रोजगार के अभाव में ऐसा होता है. हालां​कि इसे रोकने, बेरोजगारी कम करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है. डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग तथा सहकारिता विभाग अब समन्वित तरीके से काम करेंगे. जिले के चौर और वेटलैंड क्षेत्रों को आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बनाने के उद्देश्य से ‘सीवान चौर क्लस्टर विकास परियोजना को करने की तैयारी तेज कर दी गई है. यह परियोजना प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत की गई है, जिससे आधुनिक और संगठित मत्स्य पालन को बढ़ावा मिलेगा.

नाबार्ड ने सीवान जिले के लिए 195 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई है. परियोजना के पहले चरण में बसंतपुर, भगवानपुर हाट और गोरेयाकोठी प्रखंडों के चौर क्षेत्रों का चयन किया गया है. इन क्षेत्रों में जलभराव और वेटलैंड की स्थिति को मत्स्य पालन के लिए अनुकूल माना गया है.

समूहों में किया जाएगा संगठित
अधिकारियों द्वारा योग्य मत्स्य कृषकों की पहचान कर उन्हें समूहों में संगठित किया जाएगा.

इसके बाद आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक प्रबंधन और चरणबद्ध कार्ययोजना के माध्यम से मत्स्य पालन की गतिविधियां संचालित की जाएंगी.

इसके साथ ही मत्स्य पालन को एकीकृत कर ग्रामीण परिवारों की आय के कई स्रोत विकसित किए जाएंगे.

परियोजना के तहत 25 से 51 किसानों के समूह बनाए जाएंगे. इन समूहों को सहकारिता मॉडल से जोड़ा जाएगा.

ताकि वे सामूहिक रूप से उत्पादन, विपणन और वित्तीय गतिविधियां संचालित कर सकें.

जिला सहकारिता विभाग और जिला निबंधन कार्यालय से भी इस संबंध में परामर्श लिया गया है.

कॉपरेटिव एक्ट के तहत समूहों का गठन कर मत्स्य पालन को व्यवसायिक स्वरूप देने की योजना बनाई गई है.

जिला प्रशासन और संबंधित विभागों का मानना है कि यदि चौर क्षेत्रों में संगठित मत्स्य पालन सफल होता है तो स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे.

इससे युवाओं को बाहर राज्यों में काम की तलाश में जाने की आवश्यकता कम होगी.

इसके माध्यम से न केवल उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित होगा.

स्थानीय युवाओं और उद्यमियों को भी इस क्षेत्र में आगे बढ़ने का मौका मिलेगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी.

मत्स्य निदेशालय, बिहार पटना के निर्देश पर हाल ही में दो सदस्यीय विशेषज्ञ टीम सीवान पहुंची थी.

टीम ने संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर परियोजना को रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की.

इसके अलावा चौर बहुल क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर मत्स्य पालन की संभावनाओं का आकलन किया गया.

विशेषज्ञों ने विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विशेष जोर दिया, ताकि योजना का क्रियान्वयन प्रभावी ढंग से हो सके.

अधिकारियों के अनुसार क्लस्टर आधारित मॉडल इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता है.

Written by
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