नई दिल्ली. राष्ट्रीय सहकारिता विकास निगम (NCDC) और मत्स्य निदेशालय, बिहार के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को चार्मती परिसर, पटना में कोऑपरेटिव के नेतृत्व में मत्स्य पालन परिवर्तन एवं निर्यात संवर्धन विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला-सह-संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के मंत्री तथा सहकारिता विभाग के मंत्री ने संयुक्त रूप से किया. इस अवसर पर डेयरी, पशु संसाधन विभाग के सत्य एवं पशु सखव, सहकारिता विभाग के सचिव, राष्ट्रीय सहकारिता विकास निगम के वरिष्ठ पदाधिकारी, मत्स्य निदेशक वित्तीय अधिकारी, विभिन्न मत्स्य सहकारी केंद्रों के प्रतिनिधि, मत्स्य पालक किसान और अन्य हितधारक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे.
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के मंत्री ने कहां कि बिहार में मत्स्य पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक मजबूत आधार बन चुका है. अब केवल मत्स्य उत्पादन बढ़ाने पर हो नहीं, बल्कि मूल्य संवर्धन (Value Addition). प्रोसेसिंग (Processing), कोल्ड चैन, ब्रीडिंग और मत्स्य व्यवसाय को श्री बढ़ावा देने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि इस परिवर्तन में सहकारी संस्थाएं सबसे सशक्त भूमिका निभा सकती हैं.
वित्तीय सहायता और बिक्री सुविधा बढ़ेगी
सहकारिता विभाग के मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सहकार से ममृद्धि की अवधारणा को धरातल पर उतारने के लिए मत्स्य सहकारी समितियों को आधुनिक तकनीक, वित्तीय सहायता और बेहतर विपणन सुविधाओं से जोड़ना समय की मांग है.
उन्होंने मत्स्य पालकों से सहकारी मॉडल अपनाकर संगठित रूप से कार्य करने का आह्वान किया.
डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सचिव ने कहा कि विभाग मत्स्य उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, गुणवत्ता सुधार, मूल्य संवर्धन और निर्यात तक पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने की दिशा में कार्य कर रहा है.
उन्होंने वैज्ञानिक एवं आधुनिक तकनीक आधारित मत्स्य पालन को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया, ताकि इस लक्ष्य को पूरा किया जा सके.
कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने मलय उत्पादन में नई तकनीकों के उपयोग, सहकारी समितियों की भूमिका, मत्स्य उत्पादों की गुणवत्ता, निर्यात के मानकों, प्रसंस्करण, कोल्ड स्टोरेज, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में संभावनाओं पर विस्तृत जानकारी दी.
प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों के साथ संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी प्राप्त किया.
कार्यक्रम का उद्देश्य बिहार के मलय पालकों और सहकारी समितियों को आधुनिक तकनीक, वित्तीय सहयोग एवं बाजार से जोड़ते हुए राज्य में मत्स्य क्षेत्र के समग्र विकास तथा निर्यात को बढ़ावा देना था.
आयोजन के अंत में मत्स्य क्षेत्र में सहकारिता आधारित मॉडल को मजबूत बनाने और किसानों की आय में वृद्धि के लिए सभी हितधारकों ने मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया गया.










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