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Fish: फिश फीड, हैचरी और एक्वा पार्क जैसे काम के लिए हैदराबाद नहीं जाना होगा, बिहार में मिलेंगी सुविधाएं

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प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. सरकार कई ऐसे काम कर रही है, जिससे मछली पालन का काम और ज्यादा ग्रोथ करे और ज्यादा से ज्यादा लोग इस काम से जुड़ें. ताकि उनको मुनाफा हो सके. सरकार का मनना है कि मछली पालन एक अच्छा काम है और इसे करके अच्छी कमाई भी की जा सकती है. सालाना आप इस काम से चार लाख रुपए तक कमा सकते हैं. इन्हीं सब वजहों से सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं. जिसका फायदा किसानों को मिल भी रहा है. बात बिहार सरकार की करें तो राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी) का क्षेत्रीय कार्यालय पटना के नंदलाल छपरा में खोलने की योजना पर काम कर रही है.

इसके लिए सरकार की तरफ से 5.68 एकड़ जमीन का चयन कर लिया गया है. फिलहाल, इसका अस्थायी कार्यालय मत्स्य विकास भवन में होगा. यह अप्रैल के अंतिम सप्ताह से काम करने लगेगा. यह निर्णय मंगलवार को दिल्ली में डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग और केंद्रीय मंत्री तथा विकास बोर्ड के अधिकारियों की बैठक में लिया गया है.

फंड और सब्सिडी का लाभ सीधे मत्स्य पालकों तक पहुंचेगा
बिहार में एनएफडीबी का कार्यालय खुल जाने से मत्स्य पालन, फिश फीड, हैचरी और एक्वा पार्क जैसे काम के लिए हैदराबाद नहीं जाना पड़ेगा.

यह सेंटर न केवल बिहार, बल्कि पूरे मध्य-पूर्वी भारत के लिए नोडल हब के रूप में काम करेगा. इसका सबसे अधिक लाभ बिहार के मत्स्य पालकों को होगा.

अब उन्हें मछली बीज के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, ​इससे उनकी मछली पालन की लागत भी कम होगी.

डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सचिव कपिल अशोक के अनुसार, अब यहां से प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, पीएम मत्स्य किसान समृद्धि योजना, मत्स्य पालन और जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष की मॉनिटरिंग होगी, ताकि फंड और सब्सिडी का लाभ सीधे मत्स्य पालकों तक पहुंच सके.

टेक्नोलॉजी ट्रांसफर नई तकनीक जैसे बायोफ्लॉक को लैब से सीधे तालाबों तक पहुंचाया जाएगा.

उन्नत बीज की सप्लाई किसानों को हाई क्वालिटी मछली बीज मिलेंगे, जिससे उत्पादन बढ़ेगा.

चौर क्षेत्र का विकास दलदली भूमि (वेटलैंड्स) को वैज्ञानिक तरीके विकसित किया जाएगा.

मार्केट लिंकेज मछली उत्पादन के साथ-साथ उसकी प्रोसेसिंग और बजार तक पहुंच होगी.

ट्रेनिंग हब के लिए झारखंड, बंगाल, ओडिशा के अधिकारियों और किसानों के लिए, यह नॉलेज सपोर्ट सेंटर बनेगा.

उन्होंने कहा कि बिहार को मत्स्य उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाकर एक्सपोर्ट के लिए तैयार करना है.

बिहार में मछली की खपत और उत्पादन के बीच बड़ा अंतर रहा है. इससे बिहार समेत ही पूर्वोत्तर भारत के किसानों को फायदा मिलेगा.

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