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Aquaculture Insurance: एक्वाकल्चर बीमा कराने से मछली पालन में नुकसान की हो जाएगी भरपाई

तालाब में खाद का अच्छे उपयोग के लिए लगभग एक सप्ताह के पहले 250 से 300 ग्राम प्रति हेक्टेयर बिना बुझा चूना डालने की सलाह एक्सपर्ट देते हैं.
तालाब में मछली निकालते मछली पालक

नई दिल्ली. केंद्र सरकार मछली पालन को बढ़ावा देने का काम कर रही है. इसी वजह से लगातार फिशरीज सेक्टर से जोड़ने के लिए किसानों की आर्थिक मदद भी की जा रही है. किसान मछली पालन करें और इससे उन्हें अच्छी कमाई हो, इसके लिए भी काम हो रहे हैं. वहीं सरकार की तरफ से चल रही प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा के तहत बिहार में राज्य सरकार की तरफ से PM-MKSSY के तहत सुरक्षित जल, समृद्ध किसान के लिए एक्वाकल्चर बीमा योजना चलाई जा रही है. ताकि मछली पालन करने वाले किसानों को किसी भी तरह की दिक्कत न आए.

इस योजना केे तहत एकमुश्त प्रोत्साहन के रूप में सरकार की तरफ से एक लाख रुपए की आर्थिक मदद की जाती है. हालांकि निर्धारित पात्रता और शर्तों के अनुसार ही इस योजना का फायदा मिल सकता है.

योजना के बारे में यहां पढ़ें
योजना के तहत जलीय कृषि फार्म के लिए प्रीमियम की लागत का 40 फीसद व अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं के लिए अतिरिक्त 10 फीसद प्रोत्साहन दिया जाता है.

यानि जल धारक क्षेत्र के लिए 25 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर सीमा निर्धारित की गई है. अधिकतम प्रोत्साहन 4 हेक्टेयर तक के लिए एक लाख रुपए दिए जाएंगे.

एक हेक्टेयर से कम फार्म पर प्रोत्साहन आधार पर प्रीमियम का भुगतान किया जा रहा है.

किसानों को जोखिम पर कवरेज के माध्यम से एकमुश्त प्रोत्साहन के रूप में सहायता का प्रावधान है.

गहन जलीय कृषि फार्म में प्रीमियम की लागत का 40 परसेंट है और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं के लिए अतिरिक्त 10 फीसद प्रोत्साहन है.

कवर के प्रक्रार की बात करें तो केज कल्चर, आरएएस (RAS), बायो-फ्लॉक, रेसवे आदि तहत मछली पालन करने पर कवर मिल जाता है.

अधिकतम प्रोत्साहन एक लाख रुपए सरकार ने निर्धारित की है.

बीमा कंपनियों द्वारा जल से प्राकृतिक आपदाओं, रोग एवं तृतीय पक्षों के दुर्घटनापूर्ण घटनाओं से होने वाले नुकसान कवर किए जाते हैं.

मूल बीमा के अंतर्गत कवर जोखिमों के साथ-साथ रोग आदि से होने वाले अतिरिक्त जोखिम भी शामिल हैं.

क्यों कराएं एक्वाकल्यर बीमा, जानें यहां

प्राकृतिक आपदाओं, रोग एवं दुर्घटनाओं से आर्थिक सुरक्षा मिलेगी.

एकमुश्त प्रोत्साहन से बीमा प्रीमियम का भार कम होगा.

मत्स्य पालन व्यवसाय में स्थिरता और लाभ में वृद्धि होगी.

SC/ST एवं महिला लाभार्थियों को अतिरिक्त लाभ इससे मिलता है.

सरकार की सहायता से किसानों का सशक्तिकरण होता है.

निष्कर्ष
आज ही बीमा कराएं, अपने भविष्य को सुरक्षित बनाएं. अधिक जानकारी के लिए राष्ट्रीय मत्स्यकी विकास बोर्ड (NFDB) 1800-425-1660 टोल-फ्री नंबर पर कॉल करें. या फिर वेबसाईट: nfdb.dof.gov.in पर जाएं. या अपने नजदीकी मत्स्य विभाग कार्यालय से संपर्क करें.

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