नई दिल्ली. राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) और NDDB डेयरी सर्विसेज (NDS) के चेयरमैन डॉ. मीनेश सी. शाह ने NDDB की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी, NDDB डेयरी सर्विसेज द्वारा बढ़ावा दिए गए दूध उत्पादक संगठनों (MPOs) के चेयरपर्सन के साथ एक सार्थक बातचीत की. NDDB ने इस रणनीतिक तालमेल सत्र के लिए अपने सभी कार्यक्षेत्रों से 20 चेयरपर्सन की मेजबानी की. इस बातचीत के दौरान, NDDB के चेयरमैन ने MPOs को मजबूत करने और किसान-सदस्यों के लिए अधिकतम मूल्य सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू की जा रही कई आगामी पहलों के बारे में जानकारी दी.
इनमें उत्तर प्रदेश से सहज दुग्ध उत्पादक संगठन, पायस दुग्ध उत्पादक संगठन, श्री बाबा गोरखनाथ कृपा दुग्ध उत्पादक संगठन, श्वेतधारा दुग्ध उत्पादक संगठन, काशी दुग्ध उत्पादक संगठन (काशी डेयरी), हरित प्रदेश दुग्ध उत्पादक संगठन और सृजनी दुग्ध उत्पादक कंपनी लिमिटेड, राजस्थान से सखी दुग्ध उत्पादक संगठन, आशा दुग्ध उत्पादक संगठन और उजाला दुग्ध उत्पादक संगठन, आंध्र प्रदेश से श्रीजा दुग्ध उत्पादक संगठन (श्रीजा), बिहार से बापूधाम दुग्ध उत्पादक संगठन और कौशिकी महिला दुग्ध उत्पादक कंपनी लिमिटेड, मध्य प्रदेश से मालव दुग्ध उत्पादक संगठन और मुक्ता महिला दुग्ध उत्पादक संगठन, महाराष्ट्र से इंदुजा महिला दुग्ध उत्पादक कंपनी लिमिटेड और मराठवाड़ा दुग्ध उत्पादक संगठन, गुजरात से माही दुग्ध उत्पादक संगठन, पंजाब से बानी दुग्ध उत्पादक संगठन और पश्चिम बंगाल से दुग्धश्री दुग्ध उत्पादक संगठन के प्रतिनिधि शामिल थे.
इन लोगों में 18 महिलाएं भी शामिल थीं जो भारत की ग्रामीण डेयरी अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में नारी शक्ति की बढ़ती भूमिका का एक सशक्त प्रमाण है.
उन्होंने ‘श्वेत क्रांति 2.0’ के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए इस बात पर जोर दिया कि इस महत्वपूर्ण मोड़ पर उनके-अपने क्षेत्रों में रणनीतिक विस्तार क्यों जरूरी है.
देश की बढ़ती पोषण संबंधी मांगों को पूरा करने, ग्रामीण आय में उल्लेखनीय वृद्धि करने और हाशिए पर पड़े डेयरी किसानों को तेजी से संगठित क्षेत्र में शामिल करने के लिए परिचालन का विस्तार करना बेहद आवश्यक है.
इस विकास के दौर में लंबे समय तक टिके रहने और काम में बेहतरीन प्रदर्शन सुनिश्चित करने के लिए, उन्होंने नेतृत्व को कुछ मुख्य बातों पर ध्यान देने की सलाह दी.
सेवाओं और किसानों को मिलने वाले फायदों को बढ़ाने के लिए रणनीतिक रूप से विस्तार करना, काम-काज को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए बड़े पैमाने पर उत्पादन के फायदों को हासिल करने पर जोर दिया.
साथ ही कहा कि पहले से शामिल गांवों में और ज्यादा गहराई तक पहुंच बनाकर विस्तार के बजाय गहराई पर ज़ोर देना, ताकि कोई भी किसान पीछे न रह जाए.
इसके अलावा, डॉ. शाह ने यह भी बताया कि ‘सहकार से समृद्धि’ के विज़न के तहत, NDDB ने सहकारिता मंत्रालय की देखरेख में एक नई बहु-राज्य सहकारी समिति (MSCS) बनाई है, और सभी MPO इस MSCS के सदस्य बन जाएंगे.
चर्चा में शामिल अध्यक्षों ने डॉ. शाह को उनके अटूट मार्गदर्शन और दूरदर्शी नेतृत्व के लिए तहे दिल से धन्यवाद दिया.
उन्होंने इन पहलों को आगे बढ़ाने और NDDB तथा NDS के साथ मिलकर एक ज़्यादा मज़बूत, सबको साथ लेकर चलने वाला और टिकाऊ डेयरी व्यवस्था बनाने के प्रति अपनी पक्की प्रतिबद्धता दोहराई.
हम सब मिलकर, ग्रामीण लोगों की आजीविका को बदलने और भारतीय डेयरी व्यवस्था में सहकारिता की भावना को मज़बूत करने के लिए पूरी तरह समर्पित हैं.










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