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Dairy News: डेयरी सेक्टर में मजबूती से आगे बढ़ रहा है मध्य प्रदेश

Animal Husbandry: Farmers will be able to buy vaccines made from the semen of M-29 buffalo clone, buffalo will give 29 liters of milk at one go.
प्रतीकात्मक फोटो. Live stockanimal news

नई दिल्ली. मध्य प्रदेश की सरकार समृद्ध पशुपालक से समृद्ध प्रदेश की दिशा में काम कर रही है. राज्य में दूध उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है. पशुपालकों से दूध खरीदा जा रहा है. इन दोनों ही काम से पशुपालकों को फायदा हो रहा है. असल में डॉ. मोहन यादव की सरकार राज्य को मिल्क कैपिटल बनाने का सपना संजोए हुए है. यानि राज्य को नंबर वन दूध उत्पादक राज्य बनाना चाहती है. इसलिए ऐसे कई काम किए जा रहे हैं, जिससे ज्यादा से ज्यादा किसान पशुपालन में आगे हैं. इसका फायदा ये है कि उनकी इनकम बढ़ेगी और राज्य दूध उत्पादन में नंबर वन बन जाएगा.

आपको बताते चलें कि मध्य प्रदेश में पशुपालकों की आय वृद्धि के लिए जहां दूध उत्पादन और संकलन बढ़ाया जा रह है तो वहीं उत्रत नस्ल के पशु तैयार करने और आत्मनिर्भर गौ-शालाओं तथा निराश्रित गौ-वंश के स्थायी आश्रय जैसे सरकारी प्रयास भी किए जा रहे हैं. सरकार का ये दावा है कि इससे अब वो दिन दूर नहीं जब मध्य प्रदेश को देश की मिल्क कैपिटल के रुप से जाना जाएगा.

दूध उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है
राज्य में हर दिन 10 लाख लीटर दुग्ध संकलन हो रहा है.

26 हजार गांवों को जोड़कर 52 लाख लीटर प्रतिदिन संकलन का लक्ष्य है.

226 लाख टन वार्षिक दूध उत्पादन के साथ मध्य प्रदेश देश में तीसरे स्थान पर है.

दुग्ध प्रसंस्करण में वृद्धि
इंदौर में प्रतिदिन 30 मीट्रिक टन क्षमता का दूध पाउडर प्लांट शुरू किया गया है.

पांच वर्षों में दूध प्रोसेसिंग यूनिट में तीन हजार 34 करोड़ का निवेश हुआ है.

153 नए बल्क मिल्क कूलर स्थापित किए गए हैं.

नस्ल सुधार एवं स्वास्थ्य
हिरण्यगर्भा अभियान से नस्ल सुधार किया जा रहा है.

गोरस मोबाइल ऐप से संतुलित पशु आहार की जानकारी एवं मोबाइल पशु चिकित्सा की सुविधा.

पशु प्रजनन, पशु पोषण और पशु स्वास्थ्य के माध्यम से दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हो रही है.

दुग्ध समितियां गठित की गईं हैं
वर्तमान में 7000 ग्रामीण दूध सहकारी समितियां कार्यशील हैं.

1752 नयी दूध सहकारी समितियां गठित हुईं हैं.

निराश्रित गौ-वंश प्रबंधन
निराश्रित गौ-वंश के बेहतर प्रबंधन एवं संरक्षण हेतु 6000 एकड़ भूमि आवंटित की गई है.

गौ-शाला निर्माण में निजी भागीदारी सुनिश्चित की गई है.

उन्नत तकनीक के जरिए उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है.

पशु चारा संयंत्रों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है. ताकि चारे की कमी न हो सके.

डेयरी वैल्यू चैन का डिजिटली करण भी सरकार की तरफ से किया गया है.

Written by
Livestock Animal News Team

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