Home मछली पालन Fisheries: ओडिशा में 16 लोगों की इनकम फिशरीज सेक्टर पर है निर्भर
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Fisheries: ओडिशा में 16 लोगों की इनकम फिशरीज सेक्टर पर है निर्भर

अगर आप छोटे गड्ढे में मछली पालन का बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो आपको तालाब के आकार को चुनना होगा. एक से 2000 स्क्वायर फीट के तालाब में आप बढ़िया मछली पालन कर सकते हैं.
तालाब में मछली.

नई दिल्ली. भारत के पूर्वी तट पर बंगाल की खाड़ी के किनारे स्थित ओडिशा देश के प्रमुख मत्स्य उत्पादक राज्यों में से एक है, जिसके पास मीठे पानी, खारे पानी और समुद्री इकोसि‍स्‍टम सहित एक समृद्ध और विविध मत्स्य संसाधन आधार है. ओडिशा की लगभग 95 प्रतिशत आबादी मछली का सेवन करती है, जिसकी प्रति व्यक्ति खपत 19.16 किलोग्राम है. यह क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था, आजीविका, खाद्य सुरक्षा और निर्यात आय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. 2025-26 तक ओडिशा ने 12.70 लाख मीट्रिक टन (एमटी) मछली का उत्पादन किया, जिससे राज्य भर में 16 लाख से अधिक मछुआरों और मछली किसानों की आजीविका को संबल मिला.

राज्य में प्रचुर मात्रा में मत्स्य पालन संसाधन हैं, जिनमें लगभग 7.12 लाख हेक्टेयर मीठे पानी के संसाधन, 4.18 लाख हेक्टेयर खारे पानी के संसाधन और समुद्री मत्स्य पालन के लिए 24,000 वर्ग किलोमीटर का महाद्वीपीय शेल्फ क्षेत्र शामिल है. 2025-26 के दौरान मीठे पानी के मत्स्य पालन से मछली उत्पादन 8.27 लाख मीट्रिक टन, खारे पानी के जलीय कृषि से मछली उत्पादन 1.86 लाख मीट्रिक टन और समुद्री मत्स्य पालन से मछली उत्पादन 2.56 लाख मीट्रिक टन शामिल था.

हजारों करोड़ का किया सीफूड निर्यात
ओडिशा एक महत्वपूर्ण समुद्री खाद्य निर्यातक राज्य के रूप में उभरा है। 2025-26 के दौरान राज्य ने 5,428.67 करोड़ रुपये मूल्य का 1,00,897 मीट्रिक टन समुद्री खाद्य निर्यात किया.

जिसमें मुख्य रूप से झींगा और अन्य उच्च मूल्य वाली मत्स्य प्रजातियों का योगदान रहा.

प्रमुख निर्यात-उन्मुख जिलों में बालासोर, भद्रक, जगतसिंहपुर, पुरी, खुर्दा और संबलपुर शामिल हैं। मुख्य निर्यात झींगा और समुद्री मछली की विभिन्न किस्मों का होता है।

ओडि़शा भारत सरकार के प्रमुख मत्स्य विकास कार्यक्रमों, विशेष रूप से प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) में सक्रिय रूप से भागीदार रहा है.

2020 से पीएमएमएसवाई के अंतर्गत 1,301 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है.

जिनमें जलीय कृषि विस्‍तार बीज और चारा अवसंरचना, मछली विपणन, शीत श्रृंखला विकास, जलीय पशु स्वास्थ्य, मछुआरा कल्याण, बीमा कवरेज और मत्स्य पालन अवसंरचना शामिल हैं.

महत्वपूर्ण उपलब्धियों में लगभग 8.47 लाख मछुआरों को सामूहिक दुर्घटना बीमा के अंतर्गत लाना, हैचरी, चारा मिलें, जलाशय केज कल्‍चर इकाइयां, शीत भंडारण, मछली बाजार और मछली पकड़ने के बंदरगाह अवसंरचना की स्थापना शामिल है.

य‍ह प्राधिकार पत्र भारतीय ध्वज वाले मछली पकड़ने वाले जहाजों द्वारा खुले समुद्र में मत्स्य पालन के सतत दोहन के दिशा-निर्देश, 2025 के अंतर्गत एक अनिवार्य प्रावधान है.

खुले समुद्र में मछली पकड़ने या उससे जुड़ी गतिविधियों में शामिल भारतीय जहाजों के लिए डिजाइन किया गया यह एलओए पोत-विशिष्ट, गैर-हस्तांतरणीय है.

इसे आरईएएलसीआरएएफटी मत्स्यन पोत पंजीकरण पोर्टल के साथ एकीकृत किया गया है, जो सुव्यवस्थित, पता लगाने योग्य और निगरानी वाली गतिविधियों को सुनिश्चित करता है.

न्यूनतम लागत पर जारी और नवीनीकृत और बिना किसी प्रक्रियात्मक बाधा और वास्तविक समय में आवेदन ट्रैकिंग के साथ यह एलओए मछुआरों और पोत संचालकों के लिए अनुपालन को आसान बनाता है.

Written by
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