नई दिल्ली. राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड NDDB की अत्याधुनिक OPU-IVEP-ET सुविधा ने, कामधेनु यूनिवर्सिटी, आनंद के कॉलेज ऑफ वेटेरिनरी साइंस के साथ मिलकर, बायोप्सी किए गए IVF भ्रूणों से भारत के पहले स्वस्थ बछड़ों के जन्म की घोषणा की है. एनडीडीबी की ओर से कहा गया है कि यह बड़ी उपलब्धि है. ये तकनीक भ्रूण ट्रांसफर से पहले ही जेनेटिक बीमारियों की स्क्रीनिंग और जीनोमिक मूल्यांकन को संभव बनाती है, जिससे बेहतर जेनेटिक गुणों वाले बछड़ों को चुना जा सकता है. साथ ही यह तरीका सटीकता बढ़ाता है. पीढ़ी के बीच के समय को कम करता है और जेनेटिक सुधार की गति को तेज करता है.
भ्रूण बायोप्सी, जीनोमिक चयन और असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी को एक साथ लाकर, NDDB विज्ञान-आधारित और टिकाऊ जेनेटिक सुधार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराता है. जिससे डेयरी सेक्टर के अधिक उत्पादक और मज़बूत बनने का रास्ता साफ होता है.
फायदे और तरीके बारे में जानें
पशुपालन में IVF भ्रूणों की बायोप्सी का मुख्य फायदा यह है कि गर्भाधान से पहले ही भ्रूण की आनुवंशिक क्षमता, लिंग और बीमारियों की जांच की जा सकती है.
इससे पशुपालक केवल श्रेष्ठ, स्वस्थ और अपनी ज़रूरत के अनुसार (जैसे मादा बछिया) भ्रूणों का ही चयन कर सकते हैं.
आनुवंशिक रोगों की रोकथाम के लिए भ्रूण में मौजूद किसी भी आनुवंशिक बीमारी या विकार की शुरुआती चरण में ही जांच की जा सकती है, जिससे स्वस्थ और मजबूत पशुधन का जन्म होता है.
इससे सफलता दर में भी सुधार किया जा सकता है. एक्सपर्ट का कहना है कि कमजोर या खराब भ्रूणों को सरोगेट गायों में प्रत्यारोपित करने से बचा जा सकता है, जिससे गर्भधारण और स्वस्थ बछड़े के जन्म की संभावना काफी बढ़ जाती है.
वहीं इससे सर्वश्रेष्ठ नस्ल की गाय या भैंस से अंडाणु (Oocytes) निकालकर लैब में बेहतरीन सांड के वीर्य से फर्टिलाइज किए जाते हैं。
जब लैब में भ्रूण विकसित होकर ‘ब्लास्टोसिस्ट’ चरण में पहुंचता है, तो एक प्रशिक्षित भ्रूण विज्ञानी माइक्रो-सर्जरी द्वारा इसकी कुछ कोशिकाएं निकाल लेता है, जिसे भ्रूण बायोप्सी कहते हैं。
आपको बता दें कि भ्रूण में उच्च दूध उत्पादन, तेजी से बढ़ने या बीमारी से लड़ने की क्षमता जैसे आनुवंशिक गुणों को परखना。बायोप्सी के बाद, भ्रूणों को फ्रीज (Cryopreservation) कर दिया जाता है.
जांच रिपोर्ट आने के बाद, जो भ्रूण सामान्य और स्वस्थ पाए जाते हैं, केवल उन्हीं को गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है.
गर्भपात का खतरा कम: गुणसूत्र संबंधी असामान्यताएं गर्भपात के मुख्य कारणों में से एक हैं. बायोप्सी के जरिए असामान्य भ्रूणों की पहचान कर उन्हें बाहर कर दिया जाता है.












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