नई दिल्ली. राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड एनडीडीबी को सरकार ने डेयरी सेक्टर को मजबूत करने की जिम्मेदारी है. इसके तहत डेयरी सेक्टर में इकोसिस्टम यानि पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत किया जाना है. इकोसिस्टम का अर्थ उस संपूर्ण और परस्पर जुड़े हुए नेटवर्क से है, जिसमें पशुपालन, दूध उत्पादन, संग्रहण, प्रोसेसिंग, और विपणन (मार्केटिंग) तक की सभी गतिविधियां शामिल होती हैं. इसमें किसान, पशु, सहकारी समितियाँ, तकनीक, और उपभोक्ता मिलकर काम करते हैं. इससे जहां एक तरफ पशुओं का दूध उत्पादन बढ़ता है तो वहीं दूसरी ओर डेयरी किसानों को अच्छा फायदा मिलता है.
हाल ही में ‘मंथन 2026–बदलाव की राह’ (Navigating the Change) कार्यक्रम में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड यानि NDDB और उसकी सहायक कंपनियों जैसे मदर डेयरी, NDDB डेयरी सर्विसेज, IDMC लिमिटेड, इंडियन इम्यूनोलॉजिकल लिमिटेड, NDDB CALF लिमिटेड और NDDB MRIDA लिमिटेड के लीडर्स एक साथ आए ताकि NDDB इकोसिस्टम की भविष्य की दिशा पर चर्चा की जा सके.
एक-दूसरे की खूबियों का फायदा उठाएं
इस दौरान अपने समापन भाषण में, NDDB और उसकी सहायक कंपनियों के चेयरमैन डॉ. मीनेश शाह ने इस बात पर जोर दिया कि NDDB इकोसिस्टम की हर पहल का मुख्य केंद्र डेयरी किसानों का हित होना चाहिए.
‘एक NDDB परिवार’ की भावना को दोहराते हुए, उन्होंने लीडर्स से कहा कि वे तेजी और मकसद के साथ बदलाव को अपनाएं, एक-दूसरे की खूबियों का फायदा उठाएं.
पूरे इकोसिस्टम में बेहतर सहयोग बढ़ाएं और मिलकर डेयरी किसानों के लिए लंबे समय तक चलने वाला फ़ायदा पैदा करें, साथ ही भारत के सहकारी आंदोलन को मज़बूत करें.
NDDB की सहायक कंपनियों के मैनेजिंग डायरेक्टर और NDDB के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर ने अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं और भविष्य के रोडमैप को पेश किया.
वहीं, सीनियर लीडरशिप ने उभरते मौकों और संगठनात्मक प्राथमिकताओं पर चर्चा की, जिससे टिकाऊ विकास, संगठनात्मक उत्कृष्टता और किसानों को प्राथमिकता देने वाले भविष्य के लिए एक साझा विज़न को और मजबूती मिली.
निष्कर्ष
गौरतलब है कि सरकार चाहती है कि किसी भी स्थिति में किसानों की इनकम को दोगुना किया जाए और इसका वादा भी सरकार कर चुकी है. सरकार की मंशा के मुताबिक इकोसिस्टम को मजबूत करके न सिर्फ दूध उत्पादन बढ़ाया जा सकता है, बल्कि किसानों की इनकम को भी बढ़ाया जा सकता है.











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