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Dairy: गर्मियों में दूध उत्पादन बनाए रखने के वैज्ञानिक तरीकों पर करें काम

This scheme aims at the development and conservation of indigenous breeds, genetic upgradation of bovine population, enhancement of milk production and productivity of bovines thereby making dairying more remunerative to farmers. The following steps have been undertaken under the scheme.
दूध की प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. गर्मियों के मौसम में पशुओं का दूध उत्पादन बनाए रखना एक चुनौतीपूर्ण काम है. क्योंकि ज्यादा गर्मी और उमस (Heat Stress) के कारण पशु कम चारा खाते हैं और उनकी ऊर्जा शरीर को ठंडा रखने में खर्च होती है. ऐसे में पशु को गर्मी से बचाना सबसे पहला कदम है. यदि पशु का शरीर ठंडा रहेगा, तो वह तनाव मुक्त होकर बेहतर उत्पादन देगा. हवा के संचार के लिए पशुशाला में पंखे या कूलर का प्रयोग करें. पशुओं को दिन में कम से कम 2-3 बार ताजे और ठंडे पानी से नहलाना भी बेहद ही जरूरी होता है.

वहीं पशुओं को सीधी धूप से बचाएं और शेड के ऊपर पराली या हरा नेट डालें. संतुलित और ऊर्जा युक्त आहार दें. गर्मी में पशु कम चारा खाता है, इसलिए उसे कम मात्रा में अधिक पोषक तत्व देने चाहिए.

इन तरीकों को भी आजमाना चाहिए
आहारा में ‘बाईपास फैट’ शामिल करें. यह पशु को बिना शरीर का तापमान बढ़ाए अतिरिक्त ऊर्जा देता है, जिससे दूध और फैट दोनों बढ़ते हैं.

सूखे चारे की तुलना में हरे चारे (जैसे मक्का, बरसीम या साइलेज) की मात्रा बढ़ाएं क्योंकि इसमें पानी की मात्रा अधिक होती है.

दूध का लगभग 85-87 फीसद हिस्सा पानी होता है. गर्मी में पानी की कमी सीथे दूध उत्पादन को गिरा देती है.

पशु के सामने 24 घंटे साफ और ठंडा पानी उपलब्ध होना चाहिए. पानी की टंकी को छाया में रखें ताकि पानी गर्न न हो.

पसीने और लार के माध्यम से पशु के शरीर से पोटेशियम और सोडियम जैसे जरूरी मिनरल्स निकल जाते हैं.

इसलिए रोजाना 50-100 ग्राम अच्छी गुणवता वाला मिनरल मिक्सचर जरूर दें.

चारे में थोड़ा साधारण नमक और 30-50 ग्राम मीठा सोडा (Sodium Bicarbonate) मिलाएं. यह पेट की एसिडिटी (Acidosis) को रोकता है और पाचन सुधारता है.

खिलाने के सही समय की जानकारी होना भी जरूरी है. दोपहर की चिलचिलाती धूप में पशु को भारी दाना देने से बचें, क्योंकि पाचन प्रक्रिया शरीर में गमीं पैदा करती है.

पशु को दाना और चारा सुबह जल्दी (सूर्योदय से पहले) और रात के ठंडे समय में खिलाएं.

ठंडे समय में खिलाने से पशु चाव से खाता है और उसका पाचन बेहतर होता है.

गर्मी के दौरान पशुओं को तनाव मुक्त रखने के लिए उनके आहार में प्रोबायोटिक का इस्तेमाल करें. ये फायदेमंद साबित होता है.

निष्कर्ष
गर्मी में इन तरीकों को आजमाते हैं ताो फिर पशुओं से बेहतर प्रोडक्शन मिलता है. जिससे डेयरी फार्मिंग में नुकसान नहीं होगा.

Written by
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