बनई दिल्ली. भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत यशोधरा संजय खंडागले द्वारा स्थापित महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के मंगरुल गांव स्थित सजावटी मत्स्य ब्रूड बैंक का दौरा किया. इस दौरे के बाद, केंद्रीय सचिव ने पीएमएमएसवाई के लाभार्थियों से संवाद कर जमीनी स्तर पर आने वाली कमियों और चुनौतियों को समझने की कोशिश की. केन्द्रीय सचिव द्वारा दौरा किया गया ये ब्रूड बैंक भारत में अपनी तरह की पहली पहल है, जो सजावटी मछलियों की 25 से अधिक किस्मों का संरक्षण और प्रजनन करता है.
यशोधरा संजय खंडागले ने अपने ब्रांड “सैम डिस्कस” को देश में उच्च गुणवत्ता वाली डिस्कस मछलियों के अग्रणी उत्पादकों में सफलतापूर्वक स्थापित किया है. इस ब्रूड बैंक ने 20 प्रजातियों की लगभग 7.7 लाख सजावटी मछलियों का उत्पादन किया है, जिससे अनुमानित 1.93 करोड़ का राजस्व हासिल हुआ तथा लगभग 25–30 लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं.
कहां-कहां निर्यात होती है मछली
700 से अधिक टैंकों से सुसज्जित यह केंद्र कौशल विकास, रोजगार सृजन और सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने में भी सहयोग करता है, साथ ही सजावटी मत्स्य पालन क्षेत्र में निर्यात संभावनाओं को बढ़ावा देता है.
यह ब्रूड बैंक नियामक मानकों का पालन करता है तथा सामूहिक दुर्घटना बीमा योजना(जीएआईएस) और राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफार्म (एनएफडीपी) जैसी सरकारी योजनाओं के अंतर्गत भी शामिल है.
यहां से सजावटी मछलियों का निर्यात अमेरिका, इटली, फ्रांस, मॉरीशस, दक्षिण कोरिया, कतर, कुवैत, मलेशिया, चीन, उज्बेकिस्तान, नाइजीरिया और इजराइल जैसे देशों में किया जाता है.
यह मत्स्य क्षेत्र में नवाचार, सतत विकास और प्रगति को बढ़ावा देने में सरकारी सहायता के प्रभावी उपयोग को दर्शाता है.
भारत में लगभग 700 स्वदेशी मीठे पानी की तथा 300 से अधिक समुद्री प्रजातियां उपलब्ध हैं, जो इस क्षेत्र की विशाल संसाधन क्षमता को दर्शाती हैं.
भारत से सजावटी मत्स्य पालन उत्पादों का निर्यात लगभग 41 करोड़ रूपए होने का अनुमान है, जो अर्थव्यवस्था में इस क्षेत्र के बढ़ते योगदान को दर्शाता है.
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना(पीएमएमएसवाई) के अंतर्गत सजावटी मत्स्य पालन भारत में एक उच्च संभावनाओं वाले क्षेत्र के रूप में उभर रहा है, जिसे देश की समृद्ध जैव विविधता तथा घरेलू और वैश्विक स्तर पर बढ़ती मांग का समर्थन प्राप्त है.










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