नई दिल्ली. मई का महीना चल रहा है और इन दिनों भीषण गर्मी भी चल रही है. आने वाला महीना जून का है और इस दौरान भी गर्मी रहेगी. हालांकि जून की अभी शुरुआत नहीं हुई है लेकिन कुछ जगहों पर मौसम ने करवट बदली है और बारिश भी देखी गई है. ऐसे में मौसम में हुए इस बदलाव की वजह से पोल्ट्री फार्मर को और ज्यादा सतर्क हो जाने की जरूरत है. क्योंकि पोल्ट्री फार्मिंग के काम पर मौसम का बहुत ज्यादा असर पड़ता है. पोल्ट्री एक्सपर्ट कहते हैं कि मई के महीने में जिन जगहों पर बारिश हुई है वहां पर पोल्ट्री फार्म में उमस बहुत ज्यादा बढ़ सकती है. अचानक से बदले मौसम में मुर्गियों को हीट स्ट्रेस और बीमारियों से बचाने के लिए उपाय करना बेहद जरूरी है.
पोल्ट्री एक्सपर्ट के मुताबिक एक पोल्ट्री फार्मर के तौर पर हमें यह मालूम होना चाहिए कि बदलते मौसम में कब क्या करना है. तभी पोल्ट्री फार्मिंग के काम में खुद को नुकसान से बचा पाएंगे नहीं तो नुकसान होगा और इससे पोल्ट्री फार्मिंग का काम बंद भी पड़ सकता है.
क्या उपाय अजामाएं
एक्सपर्ट कहते हैं कि बारिश के बाद उमस से बचने के लिए शेड के पर्दे को पूरी तरह से ऊपर उठा देना चाहिए. जिससे हवा पोल्ट्री फार्म के आर पार हो सके और हानिकारक गैस बाहर निकल जाए.
यदि बारिश की वजह से फर्श गीला हो गया है तो फंगस और बैक्टीरिया का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा.
इस वजह से गीले फर्श को तुरंत हटा दें. नमी को रोकने के लिए भूसे में हल्का चूना छिड़क दें. जिससे ये समस्या कम हो जाएगी.
बारिश के कारण पानी भी दूषित हो सकता है. इसलिए तुरंत ही पानी बदल दें. कोशिश करें कि ऐसे मौसम में मुर्गे—मुर्गियों को ताजा पानी उपलब्ध कराएं.
उमस के दौरान फीड खाने से मुर्गियों के शरीर में गर्मी बढ़ सकती है. उन्हें दिन की बजाय सुबह या शाम के ठंडे समय में ही फीड देना चाहिए.
अगर शेड के अंदर कहीं से पानी आने की संभावना है. या पानी आ गया है तो ये मुर्गियों के लिए बहुत परेशानी खड़ी कर सकता है.
जिस जगह पर हल्की बारिश हुई है और उनके शेड में कहीं से पानी आने की संभावना है तो ये मुर्गियों के लिए खतरनाक है.
निष्कर्ष
आने वाले समय में भारी बारिश होगी. इसलिए पहले शेड की छत और दीवारों को चेक करना चाहिए. ताकि पानी टपकने की संभावना को खत्म किया जा सके. इससे बरसात में भी परेशानी नहीं होगी.











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