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Fish Production News: जम्मू और कश्मीर में ट्राउट उत्पादन 3 हजार मीट्रिक टन के पार पहुंचा

जम्मू और कश्मीर की ट्राउट की प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. जम्मू और कश्मीर ने ट्राउट उत्पादन को 2015-16 के 298 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 2025-26 में 3,010 मीट्रिक टन कर दिया है, जिससे यह भारत का अग्रणी ट्राउट उत्पादक क्षेत्र बन गया है. हिमाचल प्रदेश ने आरएएस को अपनाने में अग्रणी भूमिका निभाई है और गोल्डन महासीर का कैप्टिव ब्रीडिंग हासिल किया है. उत्तराखंड ने अपने मछली उत्पादन को दोगुना कर 10,486 मीट्रिक टन कर लिया है और “उत्तराफिश” ब्रांड के तहत मत्स्यपालन की ब्रांडिंग को बढ़ावा देते हुए लगभग 2,500 रेसवे का विस्तार किया है. वहीं लद्दाख ने उच्च ऊंचाई वाले रेगिस्तानी क्षेत्रों में एक्वाकल्चर की व्यवहार्यता को साबित किया है, जहाँ स्थानीय ट्राउट बीज उत्पादन द्रास में 30,000 बीज और चोचुट में 80,000 बीज तक पहुंच गया है.

अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, मेघालय और नागालैंड एक्वा पार्कों और मत्स्यपालन क्लस्टरों के माध्यम से हैचरी और ट्राउट खेती का विस्तार कर रहे हैं. इसी बीच, पश्चिम बंगाल, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के पहाड़ी क्षेत्र जलीय कृषि में विविधता लाने और जल दक्षता में सुधार करने के लिए आरएएस और बायोफ्लॉक तकनीकों को अपना रहे हैं.

नीतिगत पहल और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग
कोल्ड वॉटर फिशरीज के विकास को नील क्रांति योजना, पीएमएमएसवाई, पीएम-एमकेएसएसवाई, एफआईडीएफ और मछुआरों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड सुविधाओं के विस्तार के माध्यम से निरंतर नीतिगत प्रयासों द्वारा गति मिली है.

सरकार ने कोल्ड वॉटर फिशरीज के विकास के लिए ‘मॉडल दिशानिर्देश 2026’ भी जारी किए हैं.

जिसमें साइट चयन, हैचरी मानक, रोग प्रबंधन, जैव-सुरक्षा, ब्रांडिंग, प्रमाणन, ई-ट्रेडिंग और कौशल विकास शामिल हैं.

कोल्ड वॉटर फिशरीज पर यह जोर माननीय प्रधानमंत्री द्वारा ब्लू इकोनॉमी के तहत स्टार्टअप इकोसिस्टम के विस्तार, सौर ऊर्जा से संचालित बुनियादी ढांचे और लाभार्थी-उन्मुख योजनाओं को तेजी से लागू करने पर दिए गए बल के अनुरूप है.

स्टार्टअप्स ड्रोन-सक्षम लॉजिस्टिक्स, स्मार्ट फीडिंग सिस्टम, डिजिटल ट्रेसेबिलिटी प्लेटफॉर्म और किसानों को सीधे बाजारों से जोड़ने वाले मोबाइल एप्लिकेशन जैसे नवाचार पेश कर रहे हैं.

सहकारी समितियां, एसएचजी और एनजीओ क्लस्टर-आधारित उत्पादन, महिलाओं की भागीदारी और सामूहिक विपणन का समर्थन कर रहे हैं.

भारत हैचरी प्रबंधन, रोग नियंत्रण, टिकाऊ एक्वाकल्चर प्रणालियों और निर्यात रणनीतियों में ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए नॉर्वे और आइसलैंड के साथ अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को भी मजबूत कर रहा है.

भारत में कोल्ड वॉटर फिशरीज अब दूरदराज की धाराओं तक सीमित कोई मामूली गतिविधि नहीं रह गया है.

यह वैज्ञानिक नवाचार, पर्यावरणीय स्थिरता, बुनियादी ढांचे के विकास और ग्रामीण उद्यमिता को जोड़कर भारत की ब्लू इकोनॉमी का एक रणनीतिक घटक बन चुका है.

Written by
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