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Animal Husbandry: समग्र गव्य विकास योजना का फायदा लेकर सोनाली बनीं आत्मनिर्भर, कर रहीं अच्छी कमाई

murrah buffalo livestock
प्रतीकात्मक फोटो:

नई दिल्ली. देशभर में ऐसे बहुत से किसान हैं, जिनकी पास कृषि योग्य भूमि कम है. जबकि उनकी इनकम का जरिया सिर्फ और​ सिर्फ कृषि है. ऐसे किसान यदि पशुपालन करें तो वो अपनी इनकम को बढ़ा सकते हैं. सरकार भी यही चाहती है कि किसानों की इनकम को पशुपालन के जरिए बढ़ाया जाए. इसीलिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिसकी मदद से किसानों को पशुपालन करने में दिक्कते न आएं. जो किसान सरकारी मदद लेकर पशुपालन कर रहे हैं, उन्हें इसका फायदा भी मिल रहा है. वो पशुपालन करके अपनी इनकम को बढ़ा पा रहे हैं.

बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग (Dairy Fisheries and Animal Resources Department) की ओर भी कई योजनाएं चला जा रही हैं. ताकि किसान पशुपालन के काम में आगे आकर अपनी इनकम को बढ़ाएं. इसी कड़ी में विभाग की ओर से समग्र गव्य विकास योजना चलाई जा रही है. इस योजना से जुड़कर कई किसान मजबूती के साथ आगे बढ़ रहे हैं और आत्मनिर्भर बन रहे हैं.

कैमूर की सोनाली कुमारी
कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों और सही अवसर मिल जाए, तो तकदीर बदलते देर नहीं लगती. कुछ ऐसी ही कहानी है कैमूर की रहने वाली सोनाली कुमारी की है.

सोनाली के जीवन में ‘समग्र गव्य विकास योजना’ एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई. इस योजना से जुड़कर उन्होंने न सिर्फ अपने सपनों को पंख दिए, बल्कि आज वह पूरी तरह आत्मनिर्भर हैं.

योजना के तहत उन्हें 4 दुधारु गायें खरीदने के लिए सरकार की तरफ से सब्सिडी और ट्रेनिंग मिली. आज सोनाली हर महीने 18 हजार रुपए की अच्छी कमाई कर रही हैं.

सोनाली कुछ घंटों के परिश्रम से बेहतर कमाई कर रही हैं और उनके पास आगे बढ़ने का मौका भी है. आने वाले समय में पशु की संख्या बढ़ाकर उनकी कमाई और ज्यादा बढ़ सकती है.

जबकि वो अगर प्राइवेट नौकरी करें और 10 से 12 घंटे काम करें तो शायद तब भी बिहार जैसे राज्य में 18 हजार रुपए महीने में कमाना मुश्किल हो जाएगा.

सोनाली की यह कामयाबी हमारे ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं की दृढ़ इच्छा शक्ति और गव्य विकास की योजनाओं की सफलता को बयां करती है.

निष्कर्ष
बिहार सरकार की तरफ से चलाई जा रही समग्र गव्य विकास योजना का मकसद बेरोजगार युवाओं, किसानों और महिलाओं को पशुपालन से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है. इससे उन्हें स्वरोजगार मिलता है, जो वक्त की जरूरत भी है. इस योजना के जरिए 2 से 20 दुधारू मवेशियों गाय या भैंस से डेयरी यूनिट लगाने के लिए सरकार 40 से से 75 फीसद तक सब्सिडी देती है. जिसका फायदा किसानों को मिल रहा है.

Written by
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