नई दिल्ली. पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को नई गति देने के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों के लिए विशेष सहायता योजना लागू की है. स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट योजना के भाग-8 के तहत राज्यों को पशुधन क्षेत्र में सुधार के लिए 50 वर्षों की अवधि का ब्याज मुक्त लोन उपलब्ध कराया जाएगा. योजना के तहत वे राज्य अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि के भी पात्र होंगे, जो पशुधन सुधार से जुड़े निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा करेंगे. केंद्र सरकार का मानना है कि इससे राज्यों में पशुपालन क्षेत्र में पूंजी निवेश बढ़ेगा और किसानों तथा पशुपालकों की आय में वृद्धि होगी.
केंद्र सरकार की SASCI 2026-27 योजना के तहत राजस्थान को ग्रुप-1 में रखा गया है. सितंबर 2026 तक 12 लाख कृत्रिम गर्भाधान कर उनका डेटा भारत पशुधन पोर्टल पर अपलोड करने पर राज्य को 300 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि मिल सकती है. इसी लक्ष्य को लेकर 25 जून को पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने सभी संभागीय व जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक लेकर सितंबर तक हर हाल में लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए. ग्राम पंचायत स्तर तक माइक्रो प्लान तैयार कर लिया गया है.
इन सुधारों पर रहेगा फोकस
योजना के तहत कृत्रिम गर्भाधान सेवाओं का विस्तार किया जाएगा. जिसका फायदा डेयरी किसानों को सीधे तौर पर मिलेगा.
बता दें कि बेहतर नस्ल के दुधारू पशुओं की संख्या बढ़ाने के लिए सेक्स-सॉर्टड सीमेन के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा.
इसके साथ ही खुरपका-मुंहपका जैसी संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए अभियान चलाया जाएगा.
गांवों तक आधुनिक सेवाएं पहुंचाने का लक्ष्य है. योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चिकित्सा सेवाओं को मजबूत किया जाएगा.
पशुधन संजीवनी” जैसी सेवाओं के माध्यम से पशुपालकों को समय पर इलाज, कृत्रिम गर्भाधान और अन्य तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा.
निष्कर्ष
सरकार पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है. ताकि पशुपालन करके किसान अपनी इनकम को बढ़ा सकें. वहीं इसका फायदा ये भी होगा कि इससे दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी.











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