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Animal: पशुपालन में नहीं करना चाहिए ऑक्सीटोसिन का इस्तेमाल, फायदा कम नुकसान ज्यादा है

Animal Husbandry: Farmers will be able to buy vaccines made from the semen of M-29 buffalo clone, buffalo will give 29 liters of milk at one go.
प्रतीकात्मक फोटो. Live stockanimal news

नई दिल्ली. पशुपालन में ऑक्सीटोसिन का इस्तेमाल बहुत से लोग करते हैं. असल में मुख्य रूप से दुधारू पशुओं में जैसे गाय और भैंस से जल्दी और पूरा दूध हासिल करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है. यह प्राकृतिक हार्मोन है जो दूध के स्त्राव को प्रेरित करने का काम करता है. इसे आसान भाषा में समझें तो अगर कोई पशु किसी तनाव के कारण यह बछड़े की मृत्यु के बाद सामान्य रूप से दूध नहीं देता तो ऑक्सोटोसिन का इंजेक्शन लगाकर दूध बाहर निकाला जाता है. हालांकि इसके लगाने पर बैन लगा हुआ है और एक्सपर्ट ऑक्सीटोसिन न लगाने की सलाह पशुपालकों को देते हैं. क्योंकि इसके कई नुकसान भी हैं.

वहीं इसके नुकसान के बावजूद कुछ लोग इसका इस्तेमाल करने से बाज नहीं आते हैं. ऐसे में उन्हें भविष्य में नुकसान होने की संभावना रहती है. क्योंकि यह पशुओं के स्वास्थ्य के लिए बहुत ज्यादा नुकसानदेह भी होता है. इसके लगातार प्रयोग से पशुओं की प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है वह बांझ भी हो सकते हैं. इतना ही नहीं उनकी उम्र कम हो सकती है. इसी वजह से सरकार ने ऑक्सीटोसिन के इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए नियम बनाए हुए हैं. इसके बनने और बिक्री के लिए औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम के तहत सख्त नियम बना हुआ है.

बिहार सरकार ने जारी की गाइडलाइन
बिहार सरकार के डेयरी मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की ओर से दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए ऑक्सीटोसिन का उपयोग न करने की सलाह दी जाती है.

क्योंकि दुग्धारू पशुओं में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का अनावश्यक उपयोग उनके स्वास्थ्य एवं प्राकृतिक दुग्ध उत्पादन क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है.

जबकि एक्सपर्ट का कहना है कि स्वस्थ पशु ही बेहतर उत्पादन और समृद्ध पशुपालन की आधारशिला हैं.

ऑक्सीटोसिन हार्मोन का मुख्य कार्य पशुओं के प्रसव के समय गर्भाशय को संकुचित कर नवजात शिशु को बाहर आने में सहायता करना है.

इसके अतिरिक्त यह दूध ग्रंथियों को उत्तेजित कर प्राकृतिक रुप से दूध स्राव (Milk Let-down) में भी मदद करता है.

विभाग की तरफ से कहा गया कि इसका उपयोग केवल चिकित्सीय आवश्यकता एवं विशेषज्ञ की सलाह पर ही किया जाना चाहिए. क्योंकि इससे हार्मोनल असंतुलन का खतरा होता है.

कृत्रिम ऑक्सीटोसिन के अनावश्यक एवं बार-बार उपयोग से पशुओं के शरीर में हार्मोनल असंतुलन उत्पन्न हो सकता है.

इससे उनके स्वास्थ्य, प्रजनन क्षमता तथा दीर्घकालीन उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.

Written by
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