नई दिल्ली. देश भर में मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार की तरफ से बहुत सारा पैसा इंवेस्ट किया जा रहा है. यदि किसान योजनाओं का फायदा उठाकर मछली पालन करते हैं तो उन्हें कम खर्च में ज्यादा मुनाफा कमाने का मौका मिल सकता है. इन्हीं सब बातों को समझाने के लिए गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना के कॉलेज ऑफ फिशरीज (COF) ने फिश फार्मर्स डेवलपमेंट एजेंसी (FFDA), लुधियाना के सहयोग से पंजाब के इनोवेटिव फिश फार्मर्स एसोसिएशन (IFFA) के प्रगतिशील सदस्यों के लिए एक ओरिएंटेशन वर्कशॉप आयोजित की गई.
यहां किसानों को भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मत्स्य पालन विभाग (DOF) की ‘प्रधानमंत्री – मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना’ (PM-MKSSY) के तहत मत्स्य पालन क्षेत्र की विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई.
किन बातों के बारे में बताया गया
मत्स्य पालन विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के राष्ट्रीय कंसोर्टियम के हिस्से के रूप में, COF राज्य के मछली और झींगा पालकों को इस योजना के तहत दी जाने वाली विभिन्न सेवाओं और प्रोत्साहनों का लाभ उठाने के लिए वेरिफिकेशन, मॉनिटरिंग और नॉलेज सपोर्ट सर्विस दे रहा है.
प्रतिभागियों से कहा गया कि वे इस योजना के तहत क्रेडिट सुविधा, मत्स्य पालन सहकारी समितियों को मजबूत करने, एक्वाकल्चर बीमा प्रोत्साहन, परफॉर्मेंस ग्रांट और क्षमता निर्माण के लिए नेशनल फिशरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म (NFDP) पर रजिस्ट्रेशन कराएं.
COF ने उन IFFA सदस्यों का रजिस्ट्रेशन करने में मदद की जो अभी तक NFDP पर रजिस्टर्ड नहीं थे, NFDP को भारतीय मत्स्य पालन क्षेत्र को औपचारिक रूप देने के लिए लॉन्च किया गया है.
साथ ही PM-MKSSY के विभिन्न घटकों के तहत लाभ उठाने के लिए सभी प्रकार के मत्स्य पालन स्टेकहोल्डर्स के लिए इस पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है.
IFFA सदस्यों ने मछली को चारा खिलाने के मैनेजमेंट पर एक टेक्निकल सेशन में भी भाग लिया, इसमें मुख्य रूप से मछली के चारे को बनाने, उसके निर्माण और खिलाने के तरीकों में वैज्ञानिक सुझावों और इनोवेशन पर ध्यान दिया गया.
ताकि बेहतर फीड कन्वर्जन क्षमता हासिल की जा सके, उत्पादन का सही स्तर पाया जा सके और उत्पादन लागत में काफी बचत के साथ किसानों की आय बढ़ाई जा सके.
चारे का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने और चारे की बर्बादी को रोकने के लिए सुझावों पर भी चर्चा की गई.
ये सुझाव पानी की सही गुणवत्ता बनाए रखने, मछली की सेहत सुधारने और मछली की ग्रोथ और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए बहुत जरूरी हैं.
बैठक का समापन एक इंटरैक्टिव सवाल-जवाब सेशन के साथ हुआ, जिसमें एक्सपर्ट्स ने किसानों के फील्ड-लेवल के सवालों के जवाब दिए और लंबे समय तक चलने वाले एक्वाकल्चर के लिए वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया.












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