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Animal Husbandry: बिहार के मुजफ्फरपुर में पशुओं में लंपी का असर, जांच टीम पहुंची पशुपालकों के घर

दो महीने का टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है, जिससे रोग के प्रसार को समय रहते रोका जा सके.
प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. बिहार के मुजफ्फरपुर शहर के मुशहरी प्रखंड की झपहां पंचायत एवं द्रोणपुर नेउरी में लंपी बीमारी का प्रकोप बढ़ गया है. किसानों की शिकायत पर पशुओं की जांच के लिए विशेषज्ञों की टीम पहुंची है. स्थानीय लोगों ने बताया कि विशेषज्ञों की टीम झपहां स्थित गांवों में जाकर संबंधित किसानों के मवेशियों की किसानों ने मुख्यालय को लंपी बीमारी के बारे में जानकारी दी थी. जिसके बाद टीम वहां पहुंची और मवेशियों के खून, पेशाब और मल का सैंपल भोपाल भेजा गया. जांच में मवेशी के खून, पेशाब, मल के नमूने लिए गए.

हालांकि रिपोर्ट आने के बाद इस बीमारी की सही जानकारी मिल पाएगी. रिपोर्ट आने के बाद ही मवेशियों को वैक्सीन दी जाएगी. टीम में सहायक प्राध्यापक जनन विज्ञान डॉ. मंजू सिन्हा, सहायक शोध पदाधिकारी डॉ. संतोष कुमार, कनीय सहायक शोध पदाधिकारी डॉ. सुभाष कुमार तिवारी एवं पशुधन साहायक संजय कुमार शामिल हुए.
है गौरतलब है कि लोगों ने मवेशियों में लंपी रोग को लेकर किसानों ने पटना मुख्यालय को सूचना दी थी.

नियंत्रण एवं रोकथाम कैसे करें
इसपर विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बुधवार को चार प्रमुख शोध विशेषज्ञ टीम को मुशहरी के अक्रांत गांवों में जांच करने के लिए पत्र जारी किया है.

इसकी सूचना मुजफ्फरपुर पशुपालन विभाग को भी दी गई है. जिसके बाद विभाग सक्रिय हुआ और पशुओं के इलाज के लिए इस कदम को उठाया गया है.

लंपी से बचाने के लिए सभी पशुओं का LSD वैक्सीन से टीकाकरण करें. सरकारी दिशानिर्देशों का पालन करें.

नियमित रूप से कीड़ों को खत्म करने वाली दवा का छिड़काव करें. शेड और आसपास की सफाई रखें और नियमित कीटाणुनाशक से साफ करें.

बीमार पशुओं को तुरंत अलग रखें. साफ पानी और संतुलित आहार उपलब्ध कराएं ताकि प्रतिरोधक क्षमता बढ़े.

पशुओं की आवाजाही और नए पशुओं को मिश्रण करने से बचें. LSD का कोई विशेष इलाज नहीं है. यह सहायक उपचार से ठीक होती है.

बुखार के लिए एनालजेसिक पशु चिकित्सक की सलाह अनुसार दें.द्वितीयक संक्रमण घाव के लिए एंटीबायोटिक दें. विटामिन और मिनरल सप्लीमेंट दें.

घावों की सफाई करें और एंटीसेप्टिक दवा लगाएं. पशुपालकों को चाहिए कि बीमारी होने पर नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करें. खुद से कोई दवा न करें.

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