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GADVASU: डेयरी फीड और दूध में एफ्लाटॉक्सिन कंटैमिनेशन का ‘इलाज’ तलाशा जाएगा

ओएमयू साइन किया गया.

नई दिल्ली. गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना की वेटरनरी एंड लाइवस्टॉक इनोवेशन एंड इनक्यूबेशन फाउंडेशन (VLIIF) द्वारा इनक्यूबेट की गई कंपनी ‘फ्रंटरनर फार्म्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ (FFIN), भुवनेश्वर के ‘इंस्टिट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज’ (ILS) के साथ मिलकर डेयरी फीड और दूध में एफ्लाटॉक्सिन कंटैमिनेशन (दूषण) के खिलाफ माइक्रोबियल इंटरवेंशन (सूक्ष्मजीव-आधारित उपाय) विकसित करने और उन्हें फील्ड में आजमाने (वैलिडेट करने) पर काम कर रही है. इसके लिए ILS के डायरेक्टर डॉ. देबासिस डैश और FFIN के फाउंडर और CEO श्री पंकज नवानी ने एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं.

यह हस्ताक्षर कॉलेज ऑफ एनिमल बायोटेक्नोलॉजी के डीन और VLIIF के डायरेक्टर डॉ. आर. एस. सेठी, डॉ. निकोलस टॉमकिन्स और FFIN टीम की मौजूदगी में किए गए. यह सहयोग ‘माइक्रोबियल कॉम्पिटिटिव एक्सक्लूजन’ पर केंद्रित है, जिसमें टॉक्सिन बनने से पहले फ़ीड और स्टोर किए गए अनाज में टॉक्सिन पैदा करने वाले एस्परगिलस फ्लेवस (Aspergillus flavus) को दबाने के लिए स्थानीय, नॉन-टॉक्सिजेनिक माइक्रोबियल आइसोलेट्स का इस्तेमाल किया जाता है.

दूध की गुणवत्ता के जरिए होगा मूल्यांकन
FFIN पंजाब में अपने डेयरी नेटवर्क में फील्ड ट्रायल करेगा और दूध की गुणवत्ता के नतीजों के जरिए इन उपायों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करेगा.

वाइस चांसलर डॉ. जेपीएस गिल ने ILS, FFIN और VLIIF की टीमों को बधाई दी और कहा कि यह पहल एकेडमिक रिसर्च, बायोटेक्नोलॉजी, एंटरप्रेन्योरशिप और फील्ड-लेवल डेयरी इनोवेशन का एक महत्वपूर्ण संगम है.

उन्होंने इंडस्ट्री-एकेडेमिया पार्टनरशिप को बढ़ावा देने में VLIIF की भूमिका की सराहना की और जोर दिया कि वैज्ञानिक इनोवेशन को पशुधन और डेयरी सेक्टर के लिए व्यावहारिक समाधानों में बदलने के लिए इस तरह के सहयोग जरूरी है.

डॉ. आर एस. सेठी ने कहा कि यह पार्टनरशिप VLIIF इनक्यूबेशन इकोसिस्टम के तहत ILS की वैज्ञानिक क्षमताओं और FFIN के फील्ड नेटवर्क को एक साथ लाती है.

डॉ. सेठी ने कहा कि कमर्शियल फार्मिंग की स्थितियों में इन तकनीकों को वैलिडेट करने से स्टार्टअप इकोसिस्टम और सुरक्षित फीड और दूध के लिए बायोटेक्नोलॉजी-आधारित इनोवेशन के प्रति वेट यूनिवर्सिटी की प्रतिबद्धता, दोनों मजबूत होंगी.

डॉ. देबासिस डैश ने कहा कि ILS भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के बायोटेक्नोलॉजी विभाग के तहत एक स्वायत्त संस्थान है.

समझौते के तहत, ILS अपने माइक्रोबियल कल्चर कलेक्शन और मॉलिक्यूलर डिटेक्शन क्षमताओं जिसमें एफलाटॉक्सिन B1 बायोसिंथेटिक जीन की PCR-आधारित पहचान शामिल है.

इसका इस्तेमाल करके माइक्रोबियल आइसोलेट्स की खोज और उनके गुणों की पहचान (कैरेक्टराइजेशन) का नेतृत्व करेगा.

Written by
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