नई दिल्ली. मछली पालन के काम में अगर आप आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हैं तो इससे कम जगह और कम पानी में अधिक उत्पादन ले सकते हैं. यानी आपको तालाब की जरूरत नहीं पड़ेगी ना ही बड़ी जगह की. कम संसाधन में ही ज्यादा मछली का उत्पादन करके अपनी कमाई बढ़ा सकते हैं. अच्छी बात यह है कि आधुनिक तकनीक से मछली पालन करने में सरकार भी मदद कर रही है. केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह योजना के जरिए आधुनिक तकनीक से मछली पालन करने वालों को आर्थिक मदद दी जाती है.
मछली पालन में आधुनिक तकनीक की बात की जाए तो इसमें बायोफ्लाक्स तकनीक, आरएएस तकनीक केज कल्चर और ऑटोमेटिक फीडर और सेंसर प्रमुख हैं. इन आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके मछली पालन में ज्यादा मुनाफा कमाने का एक सुनहरा ऑफर मिलता है. कम संसाधन कम लागत और कम पानी की वजह से मछली पालन में मुनाफा ज्यादा बढ़ जाता है. जबकि मछलियों की देखरेख करना भी आसान रहता है. सरकार मछली पालन को बढ़ावा देना चाहती है और ज्यादा मछली का उत्पादन करना चाहती है. इस वजह से इस तरह की तकनीक को बढ़ावा देने का काम भी उनकी ओर से किया जा रहा है.
योजना के बारे में यहां पढ़ें
प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह योजना का उद्देश्य मत्स्य पालन क्षेत्र को औपचारिक रूप से तकनीकी वृद्धि में मदद पहुंचाना है.
इस योजना की शुरुआत 2023—24 मैं की गई थी और तब से 2026—27 वित्तीय वर्ष के बीच के लिए इसको चलाया जा रहा है
इस योजना के तहत करीब 6000 करोड़ रुपए का निवेश सरकार की ओर से किया गया है. जिसका बहुत से मछली किसानों ने फायदा भी उठाया है.
नेशनल फिशरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म एनएफडीपी के जरिए डिजिटल पहल जलीय कृषि बीमा और क्षमता निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है.
इस योजना का फायदा लेने के लिए अगर आप आवेदन करना चाहते हैं तो नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.
जलीय कृषि के लिए बीमा के तौर पर 40 फीसद प्रीमियम सरकार देती है. अधिकतम 10 हजार रुपए तक की मदद मिल सकती है.
इस योजना में भी सामान्य श्रेणी के मुकाबले महिलाओं, अनुसूचित जाति एससी, अनुसूचित जनजाति एसटी के लोगों को ज्यादा फायदा मिलता है.
निष्कर्ष
एक्सपर्ट का कहना है कि मछली पालन अच्छा काम है. यदि इस काम में सरकारी मदद मिल जाए तो फिर आसानी के साथ इस काम को किया जा सकता है.










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