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वैट यूनिवर्सिटी ने दाखिला लेने वाले नए छात्रों के लिए किया आयोजन

गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना ने 'दीक्षारंभ 2026' का समापन समारोह आयोजित किया. यह कॉलेज ऑफ डेयरी एंड फूड साइंस टेक्नोलॉजी, कॉलेज ऑफ फिशरीज और कॉलेज ऑफ एनिमल बायोटेक्नोलॉजी में नए दाखिला लेने वाले अंडरग्रेजुएट छात्रों के लिए एक इंडक्शन प्रोग्राम (परिचय कार्यक्रम) था. इस कार्यक्रम का आयोजन नए छात्रों को एकेडमिक माहौल, परीक्षा प्रणाली, यूनिवर्सिटी के नियमों और कानूनों, और उनके सर्वांगीण विकास के अवसरों से परिचित कराने के लिए किया गया था. इंडक्शन प्रोग्राम के दौरान, छात्रों ने एकेडमिक और परीक्षा प्रणाली, यूनिवर्सिटी के नियमों, छात्र कल्याण, NSS गतिविधियों, मानसिक स्वास्थ्य, एंटी-रैगिंग जागरूकता और करियर के अवसरों पर इंटरैक्टिव सत्रों में भाग लिया। उन्हें प्रयोगशालाओं, एक्सपेरिमेंटल डेयरी प्लांट, PAU, खेल और मनोरंजन सुविधाओं, अस्पताल और लाइब्रेरी सेवाओं का दौरा कराकर यूनिवर्सिटी के विभिन्न विभागों और सुविधाओं से भी परिचित कराया गया.
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वर्कशॉप में डेयरी विकास से जुड़ी अन्य पहलों पर हुई चर्चा

NDDB ने बेंगलुरु में 'डेयरी डेवलपमेंट के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम' (भारत सरकार) के 'कंपोनेंट B' के तहत JICA (जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी) की मदद से चल रहे 'कोऑपरेटिव्स के जरिए डेयरी उद्योग' (DTC) प्रोजेक्ट के अंतर्गत एक क्षेत्रीय कार्यशाला आयोजित की. इस कार्यशाला में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और तेलंगाना के कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन, मिल्क यूनियन और दूध उत्पादक संगठनों ने हिस्सा लिया. इसका मकसद योजना के प्रस्तावित दूसरे चरण और भारत सरकार के पशुपालन और डेयरी विभाग (मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय) तथा सहकारिता मंत्रालय की डेयरी विकास से जुड़ी अन्य पहलों पर चर्चा करना था.
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वेबसाइट की शुरुआत की गई

पशुपालकों के द्वार पर पशु चिकित्सा सेवायें (चलंत पशु अस्पताल) हेतु मानक संचालन प्रक्रिया एवं बिहार पशु प्रजनन विनियमन अधिनियम, 2025 पर तैयार की गई पुस्तिका का विमोचन तथा ब्रीडिंग पॉलिसी के कार्यान्वयन के लिए वेबसाइट का लोकार्पण किया गया. इस अवसर पर मंत्री नंदकिशोर राम, डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग, बिहार सरकार, सचिव शीर्षत कपिल अशोक, निदेशक (पशुपालन) श्रीकांत शास्त्री एवं अन्य वरीय पदाधिकारीगण उपस्थित रहे. यह पहल पशुपालकों के द्वार तक पशु चिकित्सा सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने, पशुधन के स्वास्थ्य एवं उत्पादकता को बेहतर बनाने तथा वैज्ञानिक पशु प्रजनन व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.





