नई दिल्ली. केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने भोपाल में आयोजित गोपालक सम्मेलन को संबोधित किया. इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) द्वारा प्रबंधित मध्य प्रदेश राज्य सहकारी डेयरी फेडरेशन (एमपीसीडीएफ) “सांची” की दूध प्रोसेसिंग, गुणवत्ता परीक्षण और डेयरी अवसंरचना को मजबूत करने वाली विभिन्न परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया. उन्होंने दुग्ध उत्पादकों को बोनस वितरित किया तथा सहकारिता एवं ग्रामीण विकास से जुड़ी पहलों का शुभारंभ भी किया. मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में स्वतंत्र सहकारिता मंत्रालय की स्थापना से सहकारिता क्षेत्र को नई गति मिली है.
उन्होंने आगे कहा कि सहकारी व्यवस्था किसानों एवं पशुपालकों को बेहतर मूल्य, संगठित बाजार तथा दूध की प्रोसेसिंग एवं वैल्यू एडिशन से होने वाले लाभ से जोड़ती है. उन्होंने दूध से आइसक्रीम, मक्खन, घी, चीज और मावा जैसे मूल्यवर्धित उत्पाद बनाने के लिए मजबूत प्रोसेसिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता बताई.
आधुनिक प्रजनन तकनीकों को अपनाने पर दिया जोर
नस्ल सुधार को दुग्ध उत्पादकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए उन्होंने आधुनिक प्रजनन तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया.
साथ ही सेक्स सॉर्टेड सीमन, टीकाकरण, गुणवत्तापूर्ण पशुधन एवं चारा प्रबंधन को बढ़ावा देने पर भी उन्होंने अपने भाषण में फोकस रखा.
उन्होंने मध्य प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से राज्य सरकार एवं पशुपालकों को पूर्ण सहयोग का आश्वासन भी दिया.
श्वेत क्रांति 2.0 के अंतर्गत देशभर में 75 हजार नई सहकारी डेयरियां स्थापित करने और 46 हजार मौजूदा डेयरियों को सशक्त करने के लक्ष्य का उल्लेख किया.
साथ ही कहा कि इससे मध्य प्रदेश के पशुपालकों को संगठित बाजार, बेहतर मूल्य और आधुनिक डेयरी नेटवर्क का लाभ मिलेगा.
गोबर आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने गोबर के वैज्ञानिक संग्रहण, बायोगैस, स्वच्छ ऊर्जा, पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण एवं ग्रामीण रोजगार सृजन पर बल दिया.
अपने संबोधिन के अगले हिस्से में वाराणसी एवं बनास मॉडल और एनडीडीबी के जकरियापुरा मॉडल का उल्लेख किया.
उन्होंने डेयरी सहकारिता को महिला सशक्तीकरण, किसानों की आय वृद्धि और ग्रामीण समृद्धि का प्रभावी माध्यम बताया.
सीएम मोहन यादव ने एमपी की उपलब्धियां गिनाईं. कहा कि सांची और एनडीडीबी के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के बाद प्रदेश में दूध का संकलन बढ़कर 12 लाख लीटर प्रतिदिन हो गया है.
एनडीडीबी के मार्गदर्शन में गोबर से बायोगैस एवं जैविक खाद के उत्पादन तथा सहकारिता के माध्यम से पशुपालकों की आय बढ़ाने पर भी कार्य किया जा रहा है.
साथ ही, मध्य प्रदेश में दुग्ध आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने पर जोर दिया जा रहा है.











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