नई दिल्ली. मुर्गी पालन के दौरान बेहद सामान्य दिखने वाली लेकिन उत्पादन को प्रभावित करने वाली बीमारियां मुर्गियों को बहुत सताती हैं. इन बीमारियों से बचाना बेहद ही जरूरी है. इन छोटी-छोटी बीमारियों से बचाने के लिए बस एक ही दवा काफी है और आप इसे घर पर भी तैयार कर सकते हैं. असल में हम बात कर रहे हैं, मुर्गियों में सुस्ती, सर्दी-जुकाम, छींकने और सांस की तकलीफ जैसी शुरुआती समस्याओं की. इन बीमारियों का इलाज घर की रसोई की प्राकृतिक चीजों से तैयार 100 फीसद असरदार देसी काढ़े (हर्बल एंटीबायोटिक) से किया जा सकता है.
हालांकि जब भी मुर्गियां सुस्त बैठें, पंख ढीले करके खड़ी हों या छींकें, तो उन्हें तुरंत बाकी स्वस्थ मुर्गियों से अलग कर देना चाहिए. ताकि आइसोलेशन में जाने से बीमार मुर्गियां दूसरी मुर्गियों को बीमार न कर पाएं. वहीं देरी करने पर यह संक्रमण हवा और पानी के जरिए पूरे फार्म में फैल जाता है और भारी नुकसान होता है.
कैसे तैयार करें काढ़ा
अब बात करते हैं देसी काढ़ा तैयार करने की सामग्री की. यहां हम आपको 100 मुर्गियों के हिसाब से काढ़ा तैयार करने की विधि के बारे में बताएंगे.
इसके लिए लहसुन 50 ग्राम लें. ये प्राकृतिक ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक से भरपूर होता है.
अदरक 25 ग्राम लें. अदरक सर्दी-जुकाम, कफ और पाचन सुधारने के लिए असरदार है.
हल्दी पाउडर 2 चम्मच लें. ये एंटीबैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लेमेटरी और अंदरूनी घाव भरने के लिए अच्छा है.
तुलसी के पत्ते 15 से 20 लें. ये बुखार, वायरल संक्रमण रोकने और इम्युनिटी के लिए मुफीद है.
गुड़ 50 ग्राम लें. ये मुर्गियों को तुरंत ऊर्जा (Energy) देने और काढ़ा पीने योग्य बनाने में मददगार है.
काढ़ा बनाने बात करें तो अदरक, लहसुन और तुलसी के पत्तों को अच्छी तरह कूट लें.
फिर एक बर्तन में 2 लीटर पानी लें. इसमें कुटी हुई सामग्री, 2 चम्मच हल्दी और 50 ग्राम गुड़ मिलाकर धीमी आंच पर 10 से 15 मिनट तक उबालें.
जब 2 लीटर पानी पककर 1 लीटर रह जाए, तो आंच बंद कर दें और इसे ठंडा होने दें.
ठंडा होने के बाद काढ़े को छान लें और सुबह के समय मुर्गियों के ताजे पीने के पानी में मिलाकर पीने के लिए दें.
इसके अलावा बर्तनों को रोजाना साफ करें और कभी भी फंगस लगा या सड़ा-गला दाना मुर्गियों को न दें.
निष्कर्ष
फार्म के अंदर कीटाणुओं और अमोनिया को खत्म करने के लिए हफ्ते में 1 से 2 बार ऐसी दवा का छिड़काव करें जिससे इंफेक्शन दूर हो जाए. आपको बता दें कि शुरुआती दिक्कतों के लिए काढ़ा इस्तेमाल करें, मुर्गियों को ज्यादा दिक्कत हो तो पशु चिकित्सक की सलाह भी जरूरी है.











Leave a comment