Home पशुपालन Pashu Mela: पशु मेले में मीट और अंडे के तैयाार उत्पाद दिखाए गए, पशुपालकों को एआई के फायदे बताए
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Pashu Mela: पशु मेले में मीट और अंडे के तैयाार उत्पाद दिखाए गए, पशुपालकों को एआई के फायदे बताए

पशु मेले में शामिल हुए मेहमान.

नई दिल्ली. गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘पशु पालन मेला’ में बड़ी संख्या में पशुपालकों ने शिरकत की. इस मौके पर एक्सटेंशन एजुकेशन के निदेशक डॉ. रविंदर सिंह ग्रेवाल ने कहा कि गडवासु के कुछ विभाग पशुपालन से संबंधित सेवाएं प्रदान करते हैं, जबकि कुछ विभाग पशु उत्पादों में मूल्य जोड़कर नए उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण देते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे कामों से घर बैठे अच्छी कमाई की जा सकती है. उन्होंने कहा कि इन व्यवसायों की खासियत यह है कि महिलाएं भी इन्हें आसानी से कर सकती हैं.

उन्होंने कहा कि सजावटी मछली, मछली के लिए एक्वेरियम, फ्लेवर्ड दूध, लस्सी, पनीर, मीट और अंडे का अचार, कोफ्ते, पैटीज़, मीट बॉल्स और मछली के कीमे से कई तरह के स्वादिष्ट व्यंजन बनाए जा सकते हैं. विश्वविद्यालय के डेयरी और खाद्य विज्ञान प्रौद्योगिकी कॉलेज और पशुधन उत्पादन विभाग ने कई तरह के मीट और अंडे के उत्पाद तैयार किए, जबकि मत्स्य पालन कॉलेज ने भी बड़ी संख्या में उत्पादों का प्रदर्शन किया. डॉ. ग्रेवाल ने कहा कि पशुपालन करने वाले किसानों ने पशुपालन के काम को बेहतर बनाने और वैज्ञानिक तरीके अपनाने में बहुत दिलचस्पी दिखाई.

इंसानों में फैलने वाली बीमारियों के बारे में जागरूक किया
यूनिवर्सिटी के अलग-अलग विभागों ने पशुपालक किसानों के साथ अपनी जानकारी और ज्ञान साझा किया.

पशु पोषण विभाग ने जानवरों को खिलाने के लिए बाईपास फैट और मिनरल मिक्सचर जैसी कई नई तकनीकें विकसित की हैं.

पशुपालक किसानों को पशुओं का चारा तैयार करने के लिए सही मात्रा के बारे में भी जानकारी दी गई. किसानों को कृत्रिम गर्भाधान (artificial insemination) के फायदों के बारे में भी बताया गया.

मत्स्य पालन कॉलेज ने खेती योग्य विभिन्न प्रकार की मछलियों जैसे कार्प, कैटफ़िश, झींगा और सजावटी मछलियों की प्रदर्शनी आयोजित की.

यूनिवर्सिटी के ‘सेंटर फॉर वन हेल्थ’ ने लोगों और पालतू जानवरों के मालिकों को जानवरों से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों के बारे में जागरूक किया.

यूनिवर्सिटी के पशु चिकित्सा अस्पताल के विशेषज्ञों ने, जो जानवरों की स्वास्थ्य समस्याओं के लिए काम करते हैं, किसानों को बताया कि वे किसी भी तरह की क्लिनिकल सेवा प्राप्त कर सकते हैं.

यूनिवर्सिटी के प्रकाशन जैसे ‘डेयरी फार्मिंग’, ‘पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज’, मासिक पत्रिका और अन्य प्रकाशन भी किसानों के लिए आकर्षण का केंद्र रहे.

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