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Animal News: पशुओं को बीमारियों से बचाने के लिए संतुलित पोषण और वैज्ञानिक पशु प्रबंधन है जरूरी

विचार व्यक्त करते हुए एनिमल एक्सपर्ट.

नई दिल्ली. एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि पशुपालन करने वाले पशुपालकों को पशुओं की बीमारी की रोकथाम और इलाज को लेकर जागरुक करने की जरूरत है. ताकि वो नुकसान से बचा लें. कई बार जानकारी के अभाव में नुकसान ज्यादा बड़ा हो जाता है. इसी को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), बू, तरनतारन ने तरनतारन जिले के गोद लिए गए गांव किरतोवाल खुर्द में पशुपालकों को उनके घर पर ही अच्छी क्वालिटी की पशु चिकित्सा और वैज्ञानिक सलाह देने के लिए एक व्यापक पशु कल्याण और इलाज कैंप आयोजित किया.

यह कैंप वाइस-चांसलर डॉ. जेपीएस गिल के विजन के अनुसार आयोजित किया गया था, ताकि किसानों तक पहुंच बढ़ाई जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि पशु चिकित्सा विशेषज्ञता और यूनिवर्सिटी की तकनीकों का लाभ ग्रामीण इलाकों में पशुपालकों तक पहुंचे.

पशु चिकित्सा देखभाल, बचाव वाली स्वास्थ्य देखभाल के बारे में बताया
एक्सटेंशन एजुकेशन के डायरेक्टर और मुख्य अतिथि डॉ. रविंदर सिंह ग्रेवाल ने किसानों को संबोधित किया और समय पर पशु चिकित्सा देखभाल, बचाव वाली स्वास्थ्य देखभाल, संतुलित पोषण और वैज्ञानिक पशु प्रबंधन के महत्व पर जोर दिया.

उन्होंने किसानों को पशुओं के स्वास्थ्य, उत्पादकता और फ़ार्म के मुनाफ़े को बेहतर बनाने के लिए पशुपालन के सुझाए गए तरीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया.

डिप्टी डायरेक्टर डॉ. प्रभजीत सिंह ने भी लोगों को संबोधित किया और नियमित पशु चिकित्सा सलाह, बीमारी की रोकथाम और पशुओं के वैज्ञानिक प्रबंधन के महत्व पर ज़ोर दिया.

इस कार्यक्रम का एक मुख्य आकर्षण VAHEE के प्रोफ़ेसर डॉ. आर.के. शर्मा का विस्तृत लेक्चर था, जिन्होंने किसानों को पारंपरिक पशु चिकित्सा पद्धतियों के बारे में जागरूक किया.

उन्होंने पशु स्वास्थ्य देखभाल में पारंपरिक ज्ञान के महत्व, इसके सही इस्तेमाल और आधुनिक वैज्ञानिक पशु चिकित्सा के साथ उपयोगी देसी तरीकों को जोड़ने की ज़रूरत पर चर्चा की.

गायनेकोलॉजी और ऑब्सटेट्रिक्स विभाग और वेटनरी मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञों ने भी किसानों से बातचीत की और पशुओं के प्रजनन स्वास्थ्य, बांझपन, गर्भावस्था से जुड़ी समस्याओं, बीमारी के प्रबंधन, निदान और बचाव वाली स्वास्थ्य देखभाल पर विशेषज्ञ सलाह दी.

कैंप के दौरान, पशु चिकित्सा विशेषज्ञों ने पशुओं की जाँच की और उनका इलाज किया, साथ ही ज़रूरी दवाइयाँ पूरी तरह मुफ्त में बांटी गईं.

इस पहल से किसानों को पेशेवर पशु चिकित्सा सेवाओं और पशुओं की स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न समस्याओं के व्यावहारिक समाधान तक सीधी पहुंच मिली.

कैंप में लगभग 150 किसानों ने हिस्सा लिया और विशेषज्ञ सलाह, इलाज और तकनीकी मार्गदर्शन का लाभ उठाया.

किसानों ने अपने गाँव में मुफ़्त पशु चिकित्सा सेवाएँ और दवाइयाँ उपलब्ध कराने की यूनिवर्सिटी की पहल की सराहना की और आयोजन टीम का आभार व्यक्त किया.

Written by
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