नई दिल्ली. बिहार सरकार राज्य में फिशरीज सेक्टर को मजबूत करने के लिए कई काम कर रही है. ताकि इस सेक्टर से जुड़े लोगों की इनकम बढ़े और दूसरों को भी रोजगार मिले. जिससे राज्य से पलायन को भी रोका जा सके. इसको लेकर राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि बिहार में मत्स्य क्षेत्र की व्यापक संभावनाएं हैं. मछली उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग, मूल्यवर्द्धन और बाजार तक पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करना जरूरी है. ‘विजन 2030’ के माध्यम से मछली पालन से किसानों और मत्स्यजीवियों की आय बढ़ाने, रोजगार के नए अवसर सृजित करने तथा बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बनाया जाएगा.
उन्होंने कहा कि आठ प्राथमिकता परियोजनाओं के माध्यम से सीवान, सारण, मुंगेर, मिथिला एवं मोतिहारी में विशेष मत्स्य क्लस्टरों का विकास किया जाएगा. मुख्यमंत्री ने गुरुवार को लोक सेवक आवास में ‘विजन 2030-बिहार मत्स्य प्राथमिकता परियोजना’ की समीक्षा की.
रोजगार और इनकम के नए अवसर बढ़ेंगे
इस दौरान उन्होंने बिहार को देश के अग्रणी अंतर्देशीय मछली पालन राज्यों में शामिल करने, मत्स्य उत्पादन में चरणबद्ध वृद्धि, रोजगार और आय के अवसर बढ़ाने तथा ब्लू इकॉनमी को गति देने पर विशेष जोर दिया.
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि राज्य में मछली उत्पादन को चरणबद्ध और योजनाबद्ध तरीके से बढ़ाने के लिए कार्ययोजना तैयार करें.
जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धतियों को बढ़ावा दें, ताकि मत्स्य उत्पादन के साथ मत्स्यजीवी परिवारों की आय में भी वृद्धि हो.
उन्होंने कहा कि मत्स्यजीवी सहयोग समितियों को और अधिक सशक्त बनाएं. समितियों के कौशल विकास, तकनीकी क्षमता में वृद्धि, बेहतर प्रबंधन तथा उत्पादन बढ़ाने के लिए आवश्यक सहयोग कराएं, ताकि उनको आर्थिक स्थिति मजबूत हो और कुल राजस्व र में वृद्धि हो.
बैठक में डेयरी मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने बताया कि ‘विजन 2030’ के तहत सतत विकास एवं मूल्यवर्द्धन के माध्यम से मत्स्य क्षेत्र को नई दिशा देने का रोडमैप तैयार किया गया है.
इसके तहत आठ प्राथमिकता परियोजनाओं के माध्यम से 1,848.75 हेक्टेयर के प्रत्यक्ष हस्तक्षेप क्षेत्र तथा 9,357 हेक्टेयर के परियोजना प्रभाव क्षेत्र को विकसित करने का प्रस्ताव है.
इन परियोजनाओं के माध्यम से 50,200 मीट्रिक टन मछली उत्पादन का लक्ष्य है. जिससे राज्य में खुशहाली आएगी और इस सेक्टर के लोग मजबूत होंगे.
परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए फिशरीज एंड एक्वाकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड एवं प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के माध्यम से वित्तीय सहायता प्राप्त करने का प्रस्ताव है.
इससे मछली उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण, मूल्यवर्द्धन, विपणन और रोजगार सृजन की गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा.
इससे मछली उत्वदन के साथ-साथ प्रसंस्करण, मूल्यवर्द्धन, विपणन और रोजगार सृजन की गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा.










