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Animal News: एंटीबायोटिक का ज्यादा इस्तेमाल और पशु फीड में मिलावट इंसानों के लिए भी है खतरनाक

Animal Husbandry: Farmers will be able to buy vaccines made from the semen of M-29 buffalo clone, buffalo will give 29 liters of milk at one go.
प्रतीकात्मक फोटो. Live stockanimal news

नई दिल्ली. पशु से मिलने वाला उत्पाद जैसे दूध को हम इंसान अपनी सेहत को सही रखने के लिए पीते हैं. तब क्या हो जब ये दूध ही और अन्य उत्पादन नुकसान पहुंचाने लगें. जी हां ऐसा हो सकता है. क्योंकि पशुओं को दी जा रही एंटीबायोटिक की ओवरडोज और उनके आहार में की जा रही मिलावट के चलते ऐसा हो सकता है. इसलिए एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि न तो ज्यादा एंटीबायोटिक का इस्तेमाल किया जाए और कभी भी पशु के आहार में मिलावट न की जाए. इन दोनों चीजों पर रोकथाम बेहद ही जरूरी है.

विश्व पशु चिकित्सा दिवस के अवसर पर हरियाणा पशु विज्ञान केंद्र महेंद्रगढ़ की ओर से शहर के रेवाड़ी रोड स्थित उपनिदेशक कार्यालय में कार्यशाला का आयोजन किया गया. जहां एक्सपर्ट ने पशुपालन से जुड़े अहम मसलों पर चर्चा की. यहां बताया गया कि कैसे पशु की सेहत के साथ इंसानों की सेहत का मामला भी जुड़ा है.

इंसानों और पशु दोनों के उपचार में कठिनाइयां बढ़ रही हैं
लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. विनोद कुमार वर्मा के संयोजन में आयोजित कार्यशाला का संचालन डॉ. देवेन्द्र सिंह एवं डॉ. ज्योति सूठवाल द्वारा किया गया.

इसमें मुख्य अतिथि पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. नसीब सिंह रहे जबकि डॉ. बलजीत एवं डॉ. रोहताश विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए.

इस अवसर पर पशुओं में बढ़ते एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध पर चर्चा की गई. विशेषज्ञों ने बताया कि पशुपालन में एंटीबायोटिक्स के अनियंत्रित उपयोग के कारण यह समस्या गंभीर होती जा रही है.

बताया कि इससे इंसानों और पशु दोनों के उपचार में कठिनाइयां बढ़ रही हैं. जिसपर कंट्रोल करना बेहद ही जरूरी है.

डॉ. देवेन्द्र सिंह ने कहा कि पशुओं के स्वास्थ्य संरक्षण एवं उत्पादकता बढ़ाने के लिए इस प्रकार के आयोजन अत्यंत उपयोगी है.

डॉ. ज्योति सुंठवाल ने पशुपालन, वन्य जीव और जलवायु परिवर्तन के आपसी संबंधों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पशु आहार में मिलावट, एंटीबायोटिक व कीटनाशकों के अंश अंततः मानव स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बन सकते हैं.

कार्यक्रम में ‘वन हेल्थ’ की अवधारणा पर भी विस्तार से चर्चा की गई। इसमें मानव, पशु और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया गया.

पशुपालकों को पशु स्वास्थ्य, रोग नियंत्रण, पोषण एवं आधुनिक पशुपालन तकनीकों की जानकारी भी दी गई. जिसकी मदद से पशुपालक पशुओं की सेहत का भी ख्याल रख पाएंगे और उनसे अच्छा उत्पादन भी हासिल कर पाएंगे.

Written by
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