नई दिल्ली. बकरीद में महज तीन दिन बाकी हैं. बकरीद को लेकर मुस्लिम तेजी से तैयारी करने में जुटे हैं. ज्यादातर लोगों ने बकरे खरीद लिए है. ईद-उल-अजहा की नमाज के वक्त भी मुकर्रर हो गए हैं. नमाज के बाद कुर्बानी की जाएगी. कुर्बानी करते वक्त किन बातों का ख्याल रखना चाहिए ये लोग भूल जाते हैं. कभी-कभी लोगों की नासमझी परेशानी का सबब भी बन जाती है. इन्हीं बातों का ध्यान दिलाने क लिए जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष यानी सदर मौलाना अरशद मदनी ने देश क मुसलमानों से अपील की है कि वे कुर्बानी करत वक्त इस बात का जरूरी ध्यान रखें कि हमारे मुल्क की हुकूमत ने जो नियम बनाए हैं उन्हें ना तोड़ा जाए. दूसरा कुर्बानी करते वक्त या बाद में उसका फोटो सोशल मीडिया पर बिल्कुल भी न डाले. हम इस्लामी तौर-तरीकों से कुर्बानी करें, किसी भी किस्म का दिखावा मजहब के खिलाफ होगा.
ईद-उल-अज़हा के मौके पर भारतीय मुसलमानों के नाम अपने एक पैगाम में जमीयत उलमा-ए-हिंद के सदर मौलाना अरशद मदनी ने कहा है कि इस्लाम में कुर्बानी का कोई विकल्प नहीं है. यह एक मजहबी फरीजा है, जिसको मानना हर साहिब-ए-निसाब यानी क्षमता रखने वाले मुसलमान पर वाजिब है. इसलिए जिस मुसलमान पर कुर्बानी फर्ज है उसे हर हाल में इस फरीजे को निभाना होगा. उन्होंने कहा कि मौजूदा हालातों देखते हुए ये जरूरी है मुसलमान खुद भी बेहद अहतियात से काम लें. इसकी नुमाइश या प्रचार खासकर सोशल मीडिया पर कुर्बानी के जानवरों की तस्वीरें आदि शेयर न करें.
प्रतिबंधित जानवर की कुर्बानी न करें
मौलाना अरशद मदनी ने यह भी सलाह दी कि मुसलमान कुर्बानी करते वक्त अपने मुल्क हिंदुस्तान के हुक्म को जरूर मानें. प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी से बचें और चूंकि मज़हब में इसके बदले काले जानवर की कुर्बानी जायज़ है इसलिए किसी भी उपद्रव से बचने के लिए इसी को पर्याप्त समझा जाना बेहतर है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी जगह उपद्रवी काले जानवर की कुर्बानी से भी रोकते हैं तो समझदार और प्रभावशाली लोगों द्वारा स्थानीय प्रशासन को भरोसे में लेकर कुर्बानी की जाए. अगर फिर भी खुदा न करे इस धार्मिक कर्तव्य को निभाने का कोई रास्ता न निकले तो जिस निकटतम आबादी में कोई परेशानी न हो वहां कुर्बानी करा दी जाए लेकिन जिस जगह कुर्बानी होती आई है और फिलहाल परेशानी है वहां कम से कम बकरे की कुर्बानी अवश्य की जाए और प्रशासन के कार्यालय में इसको दर्ज भी करा दिया जाए ताकि भविष्य में कोई परेशान न हो.
अवशेषों को खुले में न फेंके बल्कि दफना दें
उन्होंने देश के मुसलमानों को ईद-उल-अज़हा के मौके पर स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने का सुझाव देते हुए कहा कि जानवरों के अवशेषों को सड़कों, गलियों और नालों में न डालें बल्कि अवशेषों को इस तरह दफन कर दिया जाए कि इससे बदबू न फैले. मौलाना मदनी ने यह भी कहा कि हर संभव प्रयास किया जाए कि हमारे काम से किसी को तकलीफ़ न पहुंचे. सांप्रदायिक तत्वों की ओर से किसी प्रकार के उपद्रव पर संयम और धैर्य से काम लेते हुए मामले की शिकायत स्थानीय थाने में अवश्य दर्ज कराई जानी चाहिए.










