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Bird Flu: बर्ड फ्लू से अब घबराने की जरूरत नहीं, एक टीका रखेगा छह महीने तक आपके मुर्गी को सेफ

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प्रतीकात्मक फोटो:

नई दिल्ली. जैसे ही बर्ड फ्लू की चर्चा होती है, वैसे ही पोल्ट्री फार्म बाजार धड़ाम कर जाता है. बर्ड फ्लू संक्रमण के आने की अफवाह भर से ही पोल्ट्री फार्मर को बड़ा नुकसान उठाना पड़ जाता है. हालांकि जिस फार्म में बायो सिक्योरिटी का पालन किया जाता है वहां पर मुर्गी मुर्गियों को बर्ड फ्लू से बचाने में कामयाबी मिल जाती है लेकिन अब पोल्ट्री फार्मरों को ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है. क्योंकि राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान भोपाल ने बर्ड फ्लू के खिलाफ पहले चरण की जंग को जीत लिया है. दरअसल यहां आपको हम ये बताना चाहते हैं कि बर्ड फ्लू पर काबू पाने के लिए वैक्सीन तैयार करके बाजार में भी उतार दिया है. गौरतलब है कि दिल्ली में हुए कार्यक्रम के दौरान वैक्सीन की तकनीक प्राइवेट कंपनी को भी दी जा चुकी है. जल्द ही लो पैथोजिन की वैक्सीन बाजार में उपलब्ध होगी.

पोल्ट्री एक्सपर्ट का ऐसा मानना है कि ज्यादातर मुर्गियों में N9 और N2 के लो पैथोजन का असर देखा जाता है. लो पैथोजन से पीड़ित मुर्गी की पहचान ये है कि वे 50 से 60 फ़ीसदी तक अंडा देना कम कर देती हैं. मुर्गियों में सांस की बीमारी हो जाती है. 7 से 8 फ़ीसदी तक मुर्गियां मरने लग जाती हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि अभी तक इस तरह के प्रभाव को रोकने के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता था. यानी वहां से वैक्सीन को मांगना पड़ता था, लेकिन अब इसे भोपाल के संस्थान में तैयार कर लिया है. एक बार लगाया टीका लगाने पर 6 महीने तक मुर्गियों को लो पैथोजन बीमारी से दूर रखा जा सकेगा.

टीका आखिरी चरण मेंः पोल्ट्री से जुड़े जानकारी यह भी बताते हैं कि भोपाल संस्थान में हाई पैथोजन का टीका तैयार करने की दिशा में काम चल रहा है और यह आखिरी चरण में है. अभी बस थोड़ा काम और बचा है. उसके बाद टीका बना कर तैयार कर दिया जाएगा. लो पैथोजन एवियन इन्फ्लूएंजा भी कहा जाता है. अगर मुर्गियों के बीच एवियन इनफ्लुएंजा फैलता है तो फिर ऐसे हालात में मुर्गियों को जमीन में दफनाने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचता है. इसकी पहचान ये है कि मुर्गियों में जुकाम होना, छींक आना और सांस बीमारी होना जैसा लक्षण दिखता है.

तेजी से फैलता है बर्ड फ्लूः देश में साल 2003 से बर्ड फ्लू के केस आ रहे हैं. कई बार पोल्ट्री कारोबार को इसके चलते बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ चुका है. अगर एक बार फिर यह बीमारी मुर्गियों में फैल जाए तो आम इंसान कई महीने तक चिकन और अंडे को हाथ तक नहीं लगाता है. जिसके चलते पोल्ट्री कारोबार ठप पड़ जाता है. पोल्ट्री कारोबारियों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ जाता है. हालांकि हाई पैथोजन की वैक्सीन आने के बाद इस नुकसान को बचा जा सकता है.

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