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Dairy: AI से पशुओं की हेल्थ की कर सकते हैं निगरानी, बढ़ता है दूध उत्पादन

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प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. देश में एआई के इस्तेमाल को बढ़ावा देने का काम हो रहा है. इसके उपयोग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है. कृषि के क्षेत्र में एआई से बड़े बदलाव की उम्मीद की जा रही है. इसका फायदा भी दिखने लगा है. वहीं कृषि की तरह पशुपालन में भी एआई का इस्तेमाल होगा. इसके जरिए पशुओं के स्वास्थ्य का पता लगाना आसान हो जाएगा. पशुओं के स्वास्थ्य का पता लगाना अब तक बड़ी चुनौती है. इससे अचानक पशु गंभीर रूप से बीमार पड़ जाते हैं. इसके अलावा किसानों को नुकसान झेलना पड़ता है. अब एआई तकनीक का इस्तेमाल करके इसे आसान बनाया जाएगा. ताकि पशुपालकों में इसका फायदा मिले.

पशुपालन में एआई का इस्तेमाल करने से इसमें दूर से ही पशुओं के स्वास्थ्य के निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जाता है. इसके प्राप्त आंकड़ों को कंप्यूटर से देखा जाता है. इससे बीमार पशुओं के असामान्य व्यवहार का पता चल जाता है. इतना ही नहीं इसके जरिए दूध उत्पादन को भी बढ़ावा देने मदद मिलती है. दूध उत्पादन बढ़ने से किसानों की आय बढ़ाने में भी फायदा होता है.

एआई का क्या-क्या फायदा है
एक फैक्ट ये भी है कि भारत में किसानों और उनके परिवारों की कमाई कृषि की सफलता पर ही निर्भर करती है. देश में कई ऐसे स्टार्टअप्स और निजी संस्थाएं हैं, जो देश के किसानों को बेहतर पैदावार के लिए नहीं तकनीक और सेवाएं मुहैया कराती हैं. इन्हीं स्टार्टअप्स के जरिए देश में खेती और पशुपालन का तरीका बदल रहा है. इसके जरिए पशुपालन में मदद मिल सकती है. क्योंकि इससे पशुओं के बारे में सभी प्रकार की जानकारी हासिल की जा सकती है. साथ ही उनके खान-पान और मौसम संबंधी बदलाव बदलते मौसम उनके व्यवहार में बदलाव रोग होने पर लक्षण और से संबंधित उत्तर आसानी से हासिल किया जा सकता है.

गर्भाधान को बेहतर बनाया जा सकता है
एआई के फायदों के बारे में बात की जाए तो इसके रखने में आसानी हो सकती है. साथ ही पशुओं के खान-पान के बारे में बेहतर डाटा हासिल करके और बेहतर बनाया जा सकता है. उनके गर्भाधान और को बेहतर बनाया जाता है. इससे उनके स्वास्थ्य को बेहतर करके दूध उत्पादन में भी इजाफा होगा. हालांकि एआईए जहां एक तरफ फायदा है. वहीं दूसरी तरहफ कई चुनौतियां भी हैं. अधिकांश एआई क्या है और इसका कैसे इसका इस्तेमाल कर सकते हैं खासतौर पर तकनीकी को समझ नहीं पाते हैं.

एआई में लगानी होती है ज्यादा पूंजी
जबकि कृषि के क्षेत्र में इसे अपनाने में देरी हो रही है. देश के पारंपरिक किसानों को इसे समझने परेशानी का सामना करना पड़ा है. क्योंकि पारंपरिक किस नई तकनीक से दूर रहते हैं. इसलिए इसे समझने में उन्हें समस्या आ रही है. इसके अलावा एक और समस्या एआई को सेटअप करने में हो रही है वह निवेश की. शुरुआत में तो इसका इस्तेमाल करना बहुत ही महंगा साबित होता है. इसके लिए अधिक पूंजी लगानी होती. इसलिए हर किसान लगा ले ये सबके बस की बात नहीं है.

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