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PPR Disease: देश के 84 शहरों में पीपीआर रोग फैलने का खतरा, यहां पढ़ें किस तरह मवेशियों को बचाएं

goat and sheep difference
भेड़ और बकरी की प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. पशुपालन करने वाले किसानों के लिए ये खबर बहुत ही महत्वपूर्ण है. दरअसल, आने वाले जून माह में पीपीआर रोग के फैलने का खतरा है. जून माह में भेड़ बकरियों में पीपीआर रोग फैलने के कारण उनकी जान पर भी बन सकती है. ये खतरा कोई एक दो जगह नहीं बल्कि देश के 84 शहरों में है. इन शहरों में इस खतरनाक बीमारी का असर देखने को मिल सकता है. ऐसे में पशुपालकों के लिए सतर्क रहना चाहिए. इसमें कुछ राज्यों में खतरा ज्यादा है. जिसमें झारखंड, असम और कर्नाटक प्रमुख हैं.

बात की जाए झारखंड की तो यहां के 20 शहरों में पीपीआर रोग भेड़ और बकरियों को अपनी चपेट में ले सकता है. जिसमें गुमला, रांची, रामगढ़, जामताड़ा, हाजारीबाग, कोडरमा, पाकुड़, पलामू, बोकारो, दुमका और कुंती अन्य शहर को हाई रिक्स जोन घोषित किया गया. यानि 20 शहरों में इस बीमारी का खतरा बहुत ही ज्यादा है. वहीं असम के बारपेटा, कछार, धेमाजी, गोलपाड़ा, गोलाघाट, करीमगंज, नलबाड़ी, दीमा हसाओ, तिनसुकिया और दक्षिण सलमारा-मनकचर में भी खतरा ज्यादा है.

इन राज्यों में भी खतरा
इसके अलावा पीपीआर रोग आंध्र प्रदेश के तीन, असम के 10, गुजरात के एक, हरियाणा के दो, हिमाचल प्रदेश के तीन, कर्नाटक के 9, केरल के दो, मध्य प्रदेश के दो, उड़ीसा के चार, राजस्थान के पांच, सिक्किम के एक तमिलनाडु के दो, तेलंगाना के चार उत्तराखंड के दो, उत्तर प्रदेश के तीन और पश्चिम बंगाल के दो शहरों को अपनी चपेट में ले सकता है. इन शहरों में भी पीपीआर रोग बकरी और भेड़ के लिए खतरा हैं. पहले भी बताया गया कि झारखंड में सबसे ज्यादा इसका खतरा है.

भेड़-बकरियों लगवाएं टीका
बता दें कि पीपीआर रोग से भेड़-बकरियों को बचाने के लिए उसका टीकाकरण महत्वपूर्ण उपाय में से एक है. इसके लिए कई पीपीआर टीके उपलब्ध है और इन्हें संवेदनशील जानवरों को लगाया जाता है. वैक्सीनेशन कराकर भेड़ व बकरियों को सुरक्षित किया जा सकता है. इसके अलावा रोग के फैलने से रोकने के लिए संक्रमित बकरियों को स्वस्थ जानवरों से अलग कर देना चाहिए. इनकी रिकवरी के लिए और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी दिया जाना चाहिए. पीपीआर रोग जिसे बकरी का प्लेग भी कहते हैं, 3 महीने की उम्र पर इसके लिए वैक्सीन लगाई जाती है. बूस्टर की जरूरत नहीं होती है. 3 साल की उम्र पर दोबारा लगवा सकते हैं. इन्‍टेरोटोक्‍समिया- 3 से 4 महीने की उम्र पर लगवा सकते हैं. अगर चाहें तो बूस्‍टर डोज पहले टीके के 3 से 4 हफ्ते बाद लगवा सकते हैं हर साल एक महीने के अंतर पर दो बार लगवाएं.

इस तरह फैलता है ये रोग
पेस्टे डेस पेटिट्स रूमिनेंट्स संक्रामक वायरल बीमारी है, जो बकरियां सहित जुगाली करने वाले पशुओं को प्रभावित करती है. ये आमतौर पर फुट एंड माउथ डिजीज के नाम से भी जाना जाता है. यह एक तेजी के साथ फैलने वाली बीमारी मानी जाती है. जो पशुओं खासकर बकरियां में भेड़ गायों और आदि जानवरों को प्रभावित करती है. अक्सर लोग इस रोग को बकरी का प्लेग भी कहते हैं. मुख्यता संक्रमित जानवरों के प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष संपर्क में रहने से फैलती है. यह वायरस खासकर बकरियों के श्वसन स्राव, नाक स्राव और दूषित उपकरणों के माध्यम से फैल सकता है. वायरस एक दूसरे से पशुओं में आसानी से फैल जाता है.

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