Home डेयरी Milk Production: पशुओं को खिलाएं बाजारा, तेजी से बढ़ेगा दूध उत्पादन, पढ़ें और क्या-क्या हैं फायदे
डेयरी

Milk Production: पशुओं को खिलाएं बाजारा, तेजी से बढ़ेगा दूध उत्पादन, पढ़ें और क्या-क्या हैं फायदे

हरित प्रदेश मिल्क प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन सदस्यों को बोनस का तोहफा दिया जा रहा है.
प्रतीकात्मक फोटो. livestock animal news

नई दिल्ली. बाजार भी पशुओं को चारे के तौर पर खिलाया जाता है. डेयरी ए​क्सपर्ट इसके कई फायदे भी गिनवाते हैं. अगर इसके फायदों के बारे में बात की जाए तो इसको खाने से पशुओं का पाचन तंत्र मज़बूत होता है. वहीं लिवर से जुड़ी बीमारियां दूर होती हैं. सबसे ज्यादा फायदा तो ये है कि दूध उत्पादन बढ़ता है. कम दूध देने वाले पशुओं को संतुलित मात्रा में बाजरा खिलाने से दूध उत्पादन बढ़ जाता है. पशुओं की कमज़ोरी दूर होती है. वहीं पशुओं को इस फसल से गर्माहट मिलती है. इसके अलावा बच्चे पैदा करने के बाद बीमार पशुओं को भी बाजरा खिलाया जा सकता है. इससे बछड़ों में ग्रोथ तेजी से होती है.

एक्सपर्ट कहते हैं कि बाजरा आमतौर पर कम बारिश और कम उर्वरता वाले क्षेत्रों में उगाया जाता है. बाजरे में सूखा सहन करने की शक्ति ज्वार की तुलना में अधिक होती है. इसकी खेती 150 से 500 मि.मी. वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों में सफलातापूर्वक की जाती है.

खेती की कैसे करें तैयारी
खेत में यदि उपयुक्त नमी न हो तो पलेवा कर एक गहरी जुताई मिट्टी पलट हल से करते हैं. इसके बाद 2-3 जुताईयां हैरो से कर खेत को बुवाई के लिये तैयार करना चाहिये. नमी संरक्षित रखने के लिये हर जुताई के बाद पाटा लगा देना चाहिये. वहीं बीज दर की बात की जाए तो बाजरे की चारा फसल के लिये बीज दर 15 से 20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रखनी चाहिये. बुवाई की विधि तथा समय पर भी गौर करना बेहतर है. चारा फसल के लिये बाजरे की बुवाई छिटकवां विधि से ही की जाती है. उत्तर भारत में इसकी बुवाई मार्च से अगस्त तथा दक्षिण भारत में फरवरी से नवम्बर तक कर सकते हैं.

खाद और उर्वरक का इस्तेमाल
बाजरे की अच्छी उपज के लिये खेत की तैयारी से पहले गोबर की खाद खेत में मिलानी चाहिये. इसके अतिरिक्त 50 किलोग्राम नत्रजन, 40 कि.ग्रा. फास्फोरस तथा 30 किलोग्राम पोटाश का प्रयोग करना चाहिए. इसमें से 1/3 नत्रजन, पूरी फास्फोरस तथा पोटाश बुवाई के समय ही खेत में मिला देनी चाहिये. नत्रजन की शेष मात्रा एक यो दो बार में सिंचाई के बाद टाप ड्रेसिंग के रूप में देनी चाहिये.

सिंचाई व निराई गुड़ाई का तरीका
गर्मी के मौसम वाली फसल में 3-4 सिंचाईयों की आवश्यकता पड़ती है. बारिश मौसम की फसल में आमतौर पर सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ती है. अधिक खरपतवार होने की दशा में फसल में एट्राजिन रसायन का एक किलोग्राम सक्रिय तत्व 1000 लीटर पानी में घोल बनाकर अंकुरण से पूर्व प्रति हेक्ट खेत में छिड़कने से खरपतवारों का नियन्त्रण होता है. कटाई तथा उपज की बात की जाए तो चारे के लिये बाजरे की अच्छी फसल से औसतन 50-60 टन/हेक्ट. हरे चारे की उपज हो जाती है. इसकी कटाई का उपयुक्त समय बुवाई के 50-55 दिन बाद होता है.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Related Articles

डेयरी

NDDB चेयरमैन ने एम्ब्रियो ट्रांसफर में आने वाली चुनौतियों को गिनाया

नई दिल्ली. डेयरी फार्मिंग का बिजनेस करने वाले तमाम डेयरी फार्मर्स बोवाइन...

डेयरी

Milk Production: 10 हजार से ज्यादा पशुपालक और दूध उत्पादकों को एक मंच पर लाया गया

नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश में दुग्धशाला विकास विभाग की स्थापना के 50...

कंकरेज नस्ल के मवेशी तथा जाफराबादी, नीली रावी, पंढरपुरी और बन्नी नस्ल की भैंसों को शामिल किया गया है. इसमें रोग मुक्त हाई जेनेटिक वाले सांडों को पंजाब सहित देश भर के वीर्य केंद्रों को उपलब्ध कराया जाता है.
डेयरी

Milk: एमपी में बढ़ गया दूध उत्पादन, मिल्क कैपिटल बनने की राह पर है राज्य

नई दिल्ली. मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार...

डेयरी

DDGS है डेयरी पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने के लिए बेहतरीन विकल्प

नई दिल्ली. डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स विद सॉल्युबल्स (DDGS) इथेनॉल उत्पादन यानि मक्का...