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Fish Farming: मछलियों को इन दिनों हो सकती है ये खतरनाक बीमारी, यहां जानें बचाव का तरीका

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प्रतीकात्मक तस्वीर का प्रयोग किया गया है।

नई दिल्ली. बरसात का मौसम धीरे-धीरे खत्म हो रहा है. ऐसे में मछली पालकों को सतर्क रहने की जरूरत है. यदि आप भी मछली पालक हैं तो होशियार हो जाइए. क्योंकि इन दिनों आपके तालाब में पल ही मछलियों को एक गंभीर बीमारी होने का खतरा है. जिसे एपीजुएटिक अल्सरेटिव सिंड्रोमअ (EUS) कहा जाता है, ये बीमारी बरसात के बाद मछलियों पर अटैक करती है और उनकी स्किन पर खून के धब्बे और घाव बना देती है. इससे मछलियों की मौत होना शुरू हो जाती है. नतीजे में मछली पालकों को नुकसान होता है.

केंद्र सरकार के मत्स्य पालन विभाग (Fisheries Department) की मानें तो इस बीमारी के हो जाने से मछलियों में मृत्यु दर बहुत ज्यादा बढ़ जाती है. ऐसे में मछली पालकों को समय रहते उनके लक्षण और कारण को जानकर बचाव करना चाहिए, नहीं तो मछली पालन के काम में बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है. लाइव स्टॉक एनिमल न्यूज (Livestock Animal News) आपको यहां बचाव आदि के बारे में अहम जानकारी देने जा रहा है.

यहां पढ़ें बीमारी से बचाव कैसे करें
मत्स्य पालन विभाग की मानें तो ये बीमारी बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है. देश में पहली बार 1983 में त्रिपुरा में मछलियों में ये बीमारी पाई गई थी. उसके बाद अन्य इलाकों में भी यह बीमारी फैलने लगी.

जब बारिश के बाद हल्की ठंड शुरू होती है, तभी बीमारी फैलती है. गहरे पानी में रहने वाली मछलियां जैसे मांगुर, सिंघाड़ा आदि मछलियों को सबसे ज्यादा यह प्रभावित करती है. वहीं तालाब में पल रही कार्प मछलियों रोहू, कतला और मृगल को भी इससे खतरा रहता है.

इस बीमारी में खून के धब्बे मछलियों की स्किन पर दिखाई देते हैं और फिर गहरे घाव, अल्सर में बदल जाते हैं. सिर और पूंछ के आसपास हिस्से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं.

इस बीमारी से बचाव करने के लिए ऐसी मछलियों का बीज कभी भी न लें जिनकी पिछली पीढ़ी बीमार या संक्रमित रही हो.

तालाब के चारो तरफ बांध बनाएं और खेती का पानी सीधे तालाब में जाने से रोकना चाहिए.

तालाब में नियमित रूप से चूने का छिड़काव करें. एक एकड़ में कम से कम 200 किलो चूना जरूर डालें. ताकि पीएच लेवल बैलेंस हो जाए.

1 एकड़ में 5 किलो मोटा नमक भी इस्तेमाल करें. जिससे मछलियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है और वह बीमार नहीं होती हैं.

पंप और ब्लोअर से तालाब में ऑक्सीजन मात्रा को घटने से रोकें. खासकर सर्दियों में ऑक्सीजन की कमी होती है. इसका ध्यान रखें.

निष्कर्ष
इस दौरान मछलियों को इस बीमारी से बचाने के लिए बताए गए कदम को उठाकर आप मछली पालन में खुद को नुकसान से बचा सकते हैं.

Written by
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