Home मछली पालन Fish Farming: मछली पालक बरसात के इस मौसम में मछलियों को पूरक आहार इस तरह खिलाएं
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Fish Farming: मछली पालक बरसात के इस मौसम में मछलियों को पूरक आहार इस तरह खिलाएं

तालाब में खाद का अच्छे उपयोग के लिए लगभग एक सप्ताह के पहले 250 से 300 ग्राम प्रति हेक्टेयर बिना बुझा चूना डालने की सलाह एक्सपर्ट देते हैं.
तालाब में मछली निकालते मछली पालक

नई दिल्ली. अगर आप मछली पालक हैं तो आपको पता होना चाहिए कि हर महीने मछली पालन में देखभाल का तरीका बदल जाता है. एक्सपर्ट का कहना है कि तरीका इस वजह से बदल जाता है, क्योंकि मौसम पानी के तापमान और मछलियों की ग्रोथ के हिसाब से उनकी ज़रूरतें भी बदलती रहती हैं. तापमान घटने बढ़ने से उनका मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है. जिससे खान-पान ऑक्सीजन के स्तर और बीमारियों से बचाव के उपाय को भी बदलना पड़ता है. अगर ऐसा ना किया जाए तो मछली पालन में नुकसान हो सकता है.

यदि आप मछली पालन करते हैं और इस काम में नुकसान नहीं चाहते तो हर महीने के हिसाब से मछली पालन में क्या बदलाव करना है. इसकी मुकम्मल जानकारी आपको करनी ही पड़ेगी. तभी मछली पालन के काम में आपको फायदा होगा, नहीं तो आपको भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है. इसी तरह से अभी जो महीना चल रहा है, उसमें भी मछली पालन में कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है. जिसके बारे में हम आपको आज बताएंगे.

अगस्त में किन बातों का ध्यान रखें
जैसे अगस्त के महीने में मछली पालकों को पूरक आहार का प्रयोग मछली के कुल वजन का 3-5 प्रतिशत की दर से करना चाहिए.

पूरक आहार के प्रयोग में हमेशा बैग फीडिंग 16-20 बैग प्रति हेक्टेयर की दर से करना चाहिए.

वहीं एक्सपर्ट का कहना है इसके साथ ही प्रति बैग में 5-10 किलो ग्राम पूरक आहार दें.

बैग में छोटा-छोटा छेद बनाकर पानी की सतह से आधा से एक फीट नीचे बांधे.

वहीं बैग से बैग की दूरी भी सही होनी चाहिए. सही दूरी 300 वर्ग मीटर यानि 10×30 मीटर रखें.

जिस बैग को एक बार प्रयोग कर लिया है उसे दूसरे दिन उपयोग ना करें.

वहीं इस बात भी ध्यान रखें कि बैग के प्रयोग से पहले उसे अच्छी तरह नमक के घोल में साफ कर सूखा लें.

वहीं फिशरीज एक्सपर्ट के मुताबिक तालाब में माह के अंत में जाल अवश्य चलवाएं.

हालांकि पंगेशियस मछली यदि तालाब में पल रही है तो उसके लिए जाल चलवाने की जरूरत नहीं है.

एक्स्ट्रा टिप्स की बात करें तो गर्मियों और बरसात में पानी में ऑक्सीजन घट सकती है, जिसके लिए समय-समय पर पानी बदलना या मशीन चलाना जरूरी होता है.

क्योंकि एयरेटर मशीन चलाने से मछलियों के तालाब की ऑक्सीजन का लेवर सही हो जाता है और इससे मछलियों को दिक्कत नहीं आती है.

वहीं हानिकारक गैसों को बाहर निकालने के लिए हर महीने चूने का इस्तेमाल किया जाना चाहिए. यदि आप इन कामों को करते हैं तो पक्का मछली पालन में खुद को नुकसान से बचा पाएंगे.

Written by
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