Home पशुपालन Animal News: देश में रजिस्टर्ड पशुओं की संख्या 39 करोड़ के है पार
पशुपालनसरकारी स्की‍म

Animal News: देश में रजिस्टर्ड पशुओं की संख्या 39 करोड़ के है पार

Animal husbandry, heat, temperature, severe heat, cow shed, UP government, ponds, dried up ponds,
प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. पशुपालन क्षेत्र को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार कई कदम उठा रही है. इस बात की जानकारी खुद सरकार के कैबिनेट मंत्री ने दी है. असल में मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ​​ललन सिंह ने कहा कि सरकार पशुधन और मत्स्य पालन क्षेत्रों को मजबूत करने और किसानों, मछुआरों और अन्य हितधारकों के लिए सेवाओं तक पहुंच में सुधार करने के लिए प्रौद्योगिकी और डिजिटल प्लेटफार्मों का लाभ उठा रही है. आज की तारीख में भारत पशुधन पोर्टल पर 12 अंकों की विशिष्ट पहचान प्रणाली, ‘पशु आधार’ के तहत पंजीकृत पशुधन की संख्या 39.23 करोड़ है. वहीं राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म (एनएफडीपी) पर 35.85 लाख मछुआरे, मछली पालक, मछली विक्रेता और अन्य हितधारक पंजीकृत हो चुके हैं.

उन्होंने कहा कि पंजीकृत हितधारकों के लिए एनएफडीपी द्वारा ऋण और बीमा तक पहुंच को सुगम बनाने के तरीके का विवरण दिया गया है. इन डिजिटल प्रणालियों, जैसे पशुपालन के लिए ‘भारत पशुधन’ और मत्स्य पालन के लिए ‘एनएफडीपी’ के तहत केसीसी आवेदनों की प्रक्रिया के लिए कोई प्रावधान नहीं है. केसीसी आवेदनों की प्रक्रिया और अनुमोदन बैंकों द्वारा उनके कोर बैंकिंग सॉफ्टवेयर सिस्टम के माध्यम से किया जाता है.

12 अंको का दिया जाता है बारकोड
सरकार ने भारत पशुधन कार्यक्रम शुरू किया है, जो प्रौद्योगिकी-आधारित, किसान-केंद्रित डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र है.

इसके तहत प्रत्येक पंजीकृत पशु को एक अद्वितीय 12 अंकों का बारकोड वाला कान का टैग दिया जाता है.

जिससे प्रजनन, स्वास्थ्य, स्वामित्व और उत्पादकता संबंधी जानकारी ट्रैक की जा सके.

सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में उपयोग किए जाने वाले मोबाइल और वेब के माध्यम से, क्षेत्र कार्यकर्ता पशु पंजीकरण का रिकार्ड रखा जाता है.

वहीं कृत्रिम गर्भाधान, टीकाकरण, रोग रिपोर्टिंग, ई-प्रिस्क्रिप्शन, राशन संतुलन और दूध उत्पादन रिकॉर्डिंग जैसी गतिविधियों को रिकॉर्ड करते हैं.

आज तक, राष्ट्रव्यापी कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम (एनएआईपी) के तहत 17.27 करोड़ कृत्रिम गर्भाधान दर्ज किए गए हैं, जिनमें 10.51 करोड़ पशु शामिल हैं और 5.98 करोड़ किसानों को लाभ हुआ है.

यह प्लेटफॉर्म उच्च आनुवंशिक गुणवत्ता वाले पशुओं के चयन में सहायता के लिए आनुवंशिक सुधार कार्यक्रमों से प्राप्त दूध उत्पादकता डेटा भी संग्रहीत करता है.

इसके अतिरिक्त, 1962 मोबाइल ऐप किसानों को उसी अद्वितीय पशु आईडी का उपयोग करके प्रामाणिक पशुधन जानकारी और सेवाओं तक पहुंचने में सक्षम बनाता है.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Related Articles

मुर्रा को पालकर पशुपालक दूध से अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं.
पशुपालन

Animal Husbandry: रिपीट ब्रीडिंग की समस्या से आसानी से पाएं छुटकारा, नुकसान से खुद को बचाएं

नई दिल्ली. पशुपालन में रिपीट ब्रीडिंग भी एक बड़ी समस्या है. ​यदि...

पशुपालन

Animal Husbandry: यूपी के 20 जिलों में पशुओं पर मंडरा रहा है लंपी स्किन डिजीज का खतरा

नई दिल्ली. लंपी स्किन डिजीज (LSD) पशुओं के लिए बेहद ही खतरनाक...

पशुपालनसरकारी स्की‍म

Animal Husbandry Scheme: पशुपालन शुरू करने में मदद कर रही है सरकार, चल रही हैं चार योजनाएं

नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश में पशुओं की संख्या बहुत ज्यादा है और...